लोकतंत्र बचाने की जंग में राहुल गांधी बने सारथी, संजय राउत ने विपक्ष की जीत पर जताई खुशी।

मुंबई। संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के दो-तिहाई बहुमत के अभाव में गिरने के बाद विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना (UBT) के दिग्गज नेता और सांसद संजय राउत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रुख की जमकर सराहना की है। राउत ने कहा कि संसद में जिस तरह राहुल गांधी ने इस विधेयक को चुनौती दी और उसे रोकने में सफल रहे, वह देश के लोकतंत्र को बचाने के आंदोलन का एक ऐतिहासिक नेतृत्व है।
"यह मोदी सरकार के पतन का आगाज़ है"
संजय राउत ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इस विधेयक को एक "राजनीतिक षड्यंत्र" करार दिया। उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण की आड़ में सरकार मतदाताओं के समीकरणों के साथ मनमानी छेड़छाड़ करना चाहती थी, ताकि भविष्य के चुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित कर सके।
राउत ने तंज कसते हुए कहा:
"प्रधानमंत्री की कुर्सी आज मात्र 16 सांसदों के सहारे टिकी है। यदि ये बैसाखी भी हट गई, तो सरकार को अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ेगा। संसद में इस योजना का विफल होना यह दर्शाता है कि अब सत्ता का पतन नजदीक है। राहुल गांधी ने उन निर्णायक 16 सांसदों को हकीकत का आईना दिखा दिया है।"
परिसीमन और 'पॉलिटिकल मैप' पर गंभीर सवाल
विधेयक के तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए राउत ने कहा कि आरक्षण के पीछे असल खेल 'परिसीमन' का था। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी अपनी सुविधा के अनुसार देश का राजनीतिक मानचित्र दोबारा तैयार करना चाहती है। उनके अनुसार, उत्तर और दक्षिण भारत के बीच जानबूझकर मतभेद पैदा किए जा रहे हैं और कुछ चुनिंदा राज्यों की ताकत बढ़ाकर दक्षिण के राज्यों को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेलने की कोशिश हो रही है।
मातृभाषा के मुद्दे पर स्पष्ट स्टैंड
मराठी भाषा की अनिवार्यता पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए संजय राउत ने कहा कि हर राज्य में स्थानीय भाषा का सम्मान और उपयोग होना चाहिए। उन्होंने इसे सरकार और आरएसएस की नीतियों के अनुरूप बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र में काम करने या शिक्षा लेने वालों को मराठी का ज्ञान होना अनिवार्य है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
