बारिश ने उजागर की लापरवाही, टोंक रोड धंसी; निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

जयपुर। गुलाबी नगरी को वैसे तो विश्व स्तरीय शहर का दर्जा दिया जाता है, लेकिन विकास कार्यों की आड़ में छिपे भ्रष्टाचार की पोल मानसून की शुरुआती फुहारों ने ही खोल दी है। मामूली सी मेघगर्जना के बीच शहर के मुख्य हिस्से में स्थित टोंक रोड पर नगर निगम कार्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर मुख्य मार्ग का एक विशाल हिस्सा अचानक जमींदोज हो गया। इस अप्रत्याशित हादसे ने प्रशासनिक दावों और सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे के बाद यातायात बंद और राहत कार्य शुरू
सड़क का बड़ा भाग नीचे धंसने के कारण वहां एक गहरा और खतरनाक गड्ढा बन गया, जिससे अति व्यस्त रहने वाले इस मार्ग पर तुरंत अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आधे रास्ते पर बैरिकेड्स लगा दिए और वाहनों की आवाजाही को रोक दिया। इसके तुरंत बाद जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की टीम ने सक्रिय होकर ट्रैक्टरों के जरिए मलबा मंगवाया और गड्ढे को भरने की प्रक्रिया शुरू की। यह वाकया शाम लगभग 4:15 बजे पेश आया, जहां गनीमत यह रही कि घटना के वक्त वहां से कोई वाहन या पैदल यात्री नहीं गुजर रहा था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
घटिया निर्माण को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश
इस घटना को लेकर स्थानीय निवासियों और राहगीरों में शासन व प्रशासन के खिलाफ गहरा गुस्सा देखा जा रहा है। नागरिकों का स्पष्ट आरोप है कि यह पूरी तरह से ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की आपसी साठगांठ व बंदरबांट का प्रत्यक्ष परिणाम है। लोगों का कहना है कि बुनियादी ढांचे के नाम पर जो घालमेल किया गया था, पहली ही बारिश ने उसकी हकीकत जनता के सामने ला दी है।
आगामी तेज बारिश को लेकर बढ़ी चिंताएं
शुरुआती मानसूनी दौर में ही जब शहर के हृदय स्थल की यह स्थिति है, तो आने वाले दिनों में होने वाली मूसलाधार बारिश के दौरान प्रदेश की राजधानी की सड़कों की क्या दशा होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि इस घटना से सबक लेकर संबंधित विभाग मॉनसून के इस सीजन में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करता है या फिर अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे।
