बैंकिंग सिस्टम से एक लाख करोड़ रुपये निकालेगा आरबीआई, ओएमओ बिक्री का ऐलान

बैंकिंग प्रणाली में नकदी (लिक्विडिटी) के भारी सरप्लस को संतुलित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बड़ा कदम उठाते हुए 1 लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) बिक्री नीलामी की घोषणा की है। यह पूरी प्रक्रिया तीन अलग-अलग किस्तों में चरणबद्ध तरीके से पूरी होगी, जिसकी शुरुआत 17 सितंबर 2026 से होने जा रही है।
तरलता का स्तर और ओएमओ की जरूरत क्यों पड़ी?
वर्तमान में एफसीएनआर (B) जमाओं में भारी बढ़ोतरी और सरकारी खर्चों के चलते बैंकिंग तंत्र में तरलता का स्तर 10.43 लाख करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े पर पहुंच चुका है।
अतिरिक्त नकदी को सोखना: इस अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक पहले वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामियों का सहारा ले रहा था, लेकिन तरलता का प्रवाह अत्यधिक बने रहने के कारण अब आरबीआई ने ओएमओ के जरिए सरकारी प्रतिभूतियों की सीधी बिक्री का मार्ग अपनाया है।
प्रमुख कारण: बैंकिंग तंत्र में इस अचानक उछाल के पीछे मुख्य रूप से बैंकों द्वारा भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा गैर-निवासी [FCNR(B)] जमा जुटाए जाना और सरकार द्वारा वेतन-पेंशन जैसे मदों में किए गए भारी सरकारी खर्च हैं।
ओएमओ नीलामी का चरणबद्ध शेड्यूल
आरबीआई के नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 लाख करोड़ रुपये की यह बिक्री तीन किस्तों में आयोजित होगी:
पहला चरण (17 सितंबर): 50,000 करोड़ रुपये की पहली नीलामी सुबह 9:30 से 10:30 बजे के बीच होगी। इसमें 7.59% जीएस 2029, 6.79% जीएस 2029, 7.61% जीएस 2030, 5.77% जीएस 2030, 6.68% जीएस 2031 और 8.28% जीएस 2032 जैसे सरकारी बॉन्ड्स बेचे जाएंगे।
दूसरा चरण (21 सितंबर): 25,000 करोड़ रुपये मूल्य की प्रतिभूतियों की बिक्री की जाएगी।
तीसरा चरण (28 सितंबर): 25,000 करोड़ रुपये की अंतिम किस्त की नीलामी संपन्न होगी।
आरबीआई की इस त्वरित और समयबद्ध कार्रवाई से वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनी रहेगी तथा अत्यधिक लिक्विडिटी के कारण पैदा होने वाली असंतुलन की स्थिति को प्रभावी ढंग से साधा जा सकेगा।
