दो दिन की भारी बारिश से सारंडा बेहाल, खदानों में जलभराव; प्रशासन अलर्ट

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा वनंचल क्षेत्र में पिछले दो दिनों से आसमान से आफत बनकर बरस रही मूसलाधार बारिश ने पूरे जनजीवन को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। गुवा, बड़ाजामदा, किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, नोवामुंडी, जैंतगढ़ और जगन्नाथपुर समेत पूरे इलाके की मुख्य सड़कें पानी में डूब चुकी हैं और लगातार हो रहे जलभराव के चलते तमाम नदी-नालों का जलस्तर खतरनाक रूप से ऊपर उठ गया है, जिससे आम जनमानस की मुश्किलें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं।
सारंडा क्षेत्र में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
प्रकृति के इस तांडव के कारण पश्चिमी सिंहभूम के इन तमाम प्रमुख कस्बों और ग्रामीण अंचलों में रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो गई है। लगातार हो रही झमाझम बारिश के कारण आवागमन के रास्ते अवरुद्ध हो चुके हैं, निचले रिहायशी इलाकों में पानी भर जाने से लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, और लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण स्थानीय निवासियों में डरावनी स्थिति बनी हुई है।
खदानों में पानी भरने से ठप हुआ खनन कार्य
इस मूसलाधार बारिश का सबसे बुरा और सीधा असर सेल (SAIL) की गुवा लौह अयस्क खदान पर देखने को मिला है, जहां खदान परिसर के भीतर भारी मात्रा में पानी भर जाने से सारा खनन और उत्पादन कार्य ठप पड़ गया है। खदान के विभिन्न हिस्सों में जलमग्न होने की वजह से भारी-भरकम मशीनों का संचालन करना असंभव सा हो गया है, हालांकि पानी को बाहर निकालने के लिए प्रबंधन द्वारा लगातार बड़े-बड़े पंप चलाए जा रहे हैं, लेकिन लगातार जारी बारिश के आगे राहत के सारे प्रयास बेअसर साबित हो रहे हैं।
उफान पर वैतरणी नदी और कृषि कार्यों पर संकट
जैंतगढ़ और उसके आसपास के तमाम इलाकों में लगातार बरस रहे पानी के कारण वैतरणी नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर आ गया है, जिससे नदी के किनारे बसे निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं और लोगों का आना-जाना पूरी तरह बाधित हो गया है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते दिहाड़ी मजदूरों को काम नहीं मिलने के कारण रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, वहीं किसानों के खेतों में पानी भर जाने से उनकी फसलें और कृषि कार्य बुरी तरह तबाह हो रहे हैं।
जगन्नाथपुर में खेतों में जलभराव और बाजार में किल्लत
जगन्नाथपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से क्षेत्र के सभी नदी, नाले और तालाब पूरी तरह उफान पर हैं और पानी लबालब भर चुका है। खेतों में अत्यधिक जल जमा हो जाने से धान की रोपाई और अन्य कृषि गतिविधियां पूरी तरह रुक गई हैं, इसके अलावा लगातार आंधी-पानी के कारण बिजली की आपूर्ति भी बार-बार ठप हो रही है, जिससे स्थानीय बाजारों में सब्जियों की भारी कमी पैदा हो गई है और आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
