वैज्ञानिकों को मिले 84 रहस्यमयी खगोलीय पिंड, अंतरिक्ष के रहस्यों पर नई रोशनी

वाशिंगटन। खगोल वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड के रहस्यों से पर्दा उठाते हुए ऐसे 84 रहस्यमयी खगोलीय पिंडों का पता लगाया है, जो अब तक हमारी नजरों से लगभग पूरी तरह छिपे हुए थे। अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) की चंद्रा एक्स-रे वेधशाला (Chandra X-ray Observatory) के पुराने आंकड़ों के गहरे विश्लेषण के दौरान सामने आए इन अनोखे पिंडों को वैज्ञानिकों ने ‘हाइपरसॉफ्ट एक्स-रे सोर्स’ (Hypersoft X-ray Sources) नाम दिया है। इनमें से कुछ वस्तुएं हमारे सूर्य की तुलना में लाखों गुना अधिक ऊर्जा उत्सर्जित करने की क्षमता रखती हैं।
क्या है इन छिपे हुए पिंडों की विशेषता?
वैज्ञानिकों के अनुसार, इन रहस्यमयी पिंडों से निकलने वाले विकिरण का एक बहुत बड़ा हिस्सा एक्सट्रीम अल्ट्रावायलेट यानी अत्यधिक पराबैंगनी प्रकाश के रूप में होता है। अंतरिक्ष में मौजूद गैस और धूलकण इस तरह के प्रकाश को भारी मात्रा में अवशोषित कर लेते हैं। यही मुख्य कारण है कि इन वस्तुओं से निकलने वाला अधिकांश विकिरण सीधे पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता है। चंद्रा वेधशाला केवल उस बेहद कमजोर एक्स-रे विकिरण को पकड़ पाती है, जो गैस की घनी परतों को चीरकर बाहर निकलने में सफल होता है।
तकनीकी त्रुटि की आशंका और पुष्टि
इन पिंडों की खोज के बाद वैज्ञानिकों के मन में यह सवाल आया कि कहीं यह दूरबीन के उपकरणों में आई कोई तकनीकी गड़बड़ी या त्रुटि तो नहीं है। इस आशंका को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने अलग-अलग समय पर रिकॉर्ड किए गए पुराने आंकड़ों का बारीकी से मिलान किया। राहत की बात यह रही कि कई वस्तुएं अलग-अलग अवलोकनों (Observations) में बिल्कुल एक ही स्थान पर स्थिर दिखाई दीं।
इसके अलावा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) की एक्सएमएम-न्यूटन वेधशाला (XMM-Newton Observatory) के आंकड़ों से भी इनमें से कई स्रोतों की मौजूदगी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हो गई, जिससे वैज्ञानिकों का यह विश्वास और अधिक मजबूत हो गया कि ये सभी वास्तविक खगोलीय पिंड हैं।
कहां पाए गए ये खगोलीय पिंड?
शोधकर्ताओं ने हमारी आकाशगंगा के पास स्थित एंड्रोमेडा (Andromeda) और एम101 (M101) सहित छह पड़ोसी आकाशगंगाओं में ऐसे स्रोतों की पहचान की है। विभिन्न आकाशगंगाओं में इनकी संख्या 7 से 21 के बीच पाई गई है:
एम101 आकाशगंगा: इसमें कई स्रोत सीधे तौर पर आकाशगंगा की सर्पिल भुजाओं (Spiral Arms) के साथ दिखाई दिए।
दीर्घवृत्ताकार आकाशगंगाएं: कुछ अन्य स्रोत ऐसी आकाशगंगाओं में पुराने तारों की घनी आबादी के बीच मौजूद मिले।
क्या हो सकते हैं ये रहस्यमयी पिंड?
वैज्ञानिक अभी तक इस बात को लेकर पूरी तरह निश्चित नहीं हैं कि ये 84 पिंड वास्तव में किस श्रेणी के हैं, लेकिन उनकी संभावित सूची में कई बड़े खगोलीय नाम शामिल हैं:
सफेद बौने तारे (White Dwarfs)
नोवा (Nova) विस्फोट के अवशेष
न्यूट्रॉन तारे (Neutron Stars)
विशेष परिस्थितियों में अपने आसपास के पदार्थों को निगल रहे ब्लैक होल्स
विशेषज्ञों का कहना है कि ‘हाइपरसॉफ्ट’ शब्द किसी एक विशेष प्रकार के खगोलीय पिंड का नाम नहीं है, बल्कि यह उन पिंडों से निकलने वाले बेहद कम ऊर्जा वाले एक्स-रे विकिरण की अनोखी विशेषता को दर्शाता है।
टाइप-1ए सुपरनोवा के रहस्य से जुड़ा कनेक्शन
इस महत्वपूर्ण खोज का एक बड़ा पहलू टाइप-1ए सुपरनोवा (Type-1a Supernova) के अनसुलझे रहस्यों से जुड़ा हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ सफेद बौने तारे अपने नजदीकी साथी तारों से लगातार पदार्थ खींचते रहते हैं और समय के साथ अत्यधिक अस्थिर होकर एक विशाल विस्फोट का रूप ले लेते हैं। ब्रह्मांड विज्ञान में इन घटनाओं का उपयोग अंतरिक्ष की दूरियों और उसके विस्तार (Expansion of the Universe) को मापने के लिए मानक पैमाने के रूप में किया जाता है। इस नई खोज से वैज्ञानिकों को तारों के विकास के चरण और ब्रह्मांड में होने वाली बेहद शक्तिशाली घटनाओं को समझने में अभूतपूर्व मदद मिलने की उम्मीद है।
