बारिश के मौसम में अमरावती में बढ़ा सांपों का खतरा, 3 महीने में 734 लोगों को डंसा

अमरावती (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के अमरावती जिले में मानसून और बारिश के मौसम की शुरुआत के साथ ही सर्पदंश (सांप काटने) की घटनाओं में अचानक तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, मई से जुलाई के बीच महज तीन महीनों की अवधि में जिले भर में कुल 734 लोगों को सांप ने अपना शिकार बनाया, जिनमें से समय पर उचित उपचार न मिलने या गंभीर स्थिति के चलते 7 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इन डरावने आंकड़ों के सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और नागरिकों से बारिश के इस मौसम में विशेष सतर्कता व सावधानी बरतने की अपील की है।

मानसून के दौरान खेतों, मैदानों और खुले स्थानों पर भारी पानी भर जाता है। इसके अलावा, रिहायशी मकानों के आसपास उग आई झाड़ियों, बड़ी घास और नमी के बढ़ने के कारण सांप अपने बिलों से निकलकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में मानव बस्तियों और रिहायशी इलाकों का रुख करने लगते हैं। विशेष तौर पर ग्रामीण, आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए यह खतरा और अधिक गंभीर हो जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट सलाह दी है कि रात के समय अंधेरे में घर से बाहर निकलते वक्त तथा खेतों में कृषि कार्य करते समय अत्यधिक सावधानी और सतर्कता बरती जानी चाहिए।

इर्विन अस्पताल में पहुंचे सर्पदंश के सर्वाधिक मरीज

जिला सामान्य अस्पताल के अंतर्गत आने वाले इर्विन अस्पताल (Irwin Hospital) में मई से जुलाई के बीच सर्पदंश के कुल 357 पीड़ित मरीजों का सफल व असफल उपचार किया गया। इनमें से दुर्भाग्यवश 6 मरीजों की जान अस्पताल में इलाज के दौरान नहीं बचाई जा सकी। इसी तरह, चुरणी उपजिला अस्पताल में भी इस दौरान सांप काटने के 96 मरीजों को भर्ती कराया गया, जिनमें से 1 मरीज की उपचार के दौरान मौत की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सांप काटने की स्थिति में 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती समय) बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए जरा भी देरी किए बिना पीड़ित व्यक्ति को बिना झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े सीधे किसी नजदीकी अधिकृत अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए ताकि समय रहते एंटी-वेनम (Anti-snake venom) इंजेक्शन दिया जा सके।

मई से जुलाई के बीच 433 लोगों को डंसा बिच्छू

जिले में सर्पदंश के अलावा विषैले जीवों के डंक मारने की अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। इन तीन महीनों (मई से जुलाई) के दौरान कुल 433 लोगों को बिच्छुओं ने डंसा। हालांकि, इस मोर्चे पर एक राहत भरी खबर यह रही कि बिच्छूदंश के शिकार हुए किसी भी मरीज की जान नहीं गई और सभी पूरी तरह स्वस्थ हो गए।

स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि बारिश के इस मौसम में अपने घरों के आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, कचरा जमा न होने दें और झाड़ियों को समय-समय पर काटते रहें। इसके अलावा, पैरों में जूते या पहने जाने वाले कपड़ों को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह जांच लें, और रात के वक्त बाहर निकलते समय हमेशा टॉर्च या पर्याप्त रोशनी का ही उपयोग करें। किसी भी व्यक्ति को सांप या बिच्छू के काटने पर अंधविश्वास के तहत घरेलू नुस्खे या ओझा-गुणी के चक्कर में पड़ने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचकर आधुनिक चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

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