अबूझमाड़ के सोमारू ने मछली पालन से बदली तकदीर

रायपुर : अबूझमाड़ के दूरस्थ अंचलों में सरकारी योजनाएं ग्रामीणों की आजीविका को नई दिशा दे रही हैं। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के ग्राम ओरछा निवासी सोमारू राम उसेंडी, पिता स्व. गिलू राम, ने मत्स्य पालन को रोजगार का साधन बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। शासन की नाव-जाल योजना, मत्स्य बीज पर अनुदान और विभागीय मार्गदर्शन से उन्होंने मछली पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया और करीब 1.25 लाख रुपए की आय अर्जित की, जिसमें लगभग 1 लाख रुपए शुद्ध आय रही।
जाल योजना से मिला काम को विस्तार देने का अवसर
सोमारू राम उसेंडी लंबे समय से मत्स्य पालन से जुड़े हैं। वर्ष 2023-24 में उन्हें मत्स्य पालन प्रसार अंतर्गत नाव-जाल योजना’’ का लाभ मिला। विभाग की ओर से जाल उपलब्ध कराए जाने से उन्हें मछली पकड़ने तथा मत्स्य गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिली। इस सहायता ने उनके पारंपरिक कार्य को आय के बेहतर अवसर में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आधा हेक्टेयर तालाब में शुरू किया व्यवस्थित पालन
विभागीय मार्गदर्शन से उसेंडी ने अपनी भूमि पर करीब 0.500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तालाब विकसित किया। मत्स्य पालन प्रसार योजना के तहत उन्हें मत्स्य बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान भी मिला। विभागीय सहायता और अपने योगदान से उन्होंने तालाब में मत्स्य बीज का संचयन किया और मछली पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।
1000 किलो उत्पादन, 1.25 लाख की बिक्री
मेहनत और योजनाओं के बेहतर उपयोग का परिणाम उत्साहजनक रहा। उनके तालाब से करीब 1000 किलोग्राम मत्स्य उत्पादन होने की संभावना दर्ज की गई। उत्पादित मछलियों को स्थानीय हाट-बाजार में बेचकर उन्होंने लगभग 1.25 लाख रुपए की आय अर्जित की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें करीब 1 लाख रुपए की शुद्ध आय रही।
दूरस्थ गांवों में आजीविका का नया मॉडल
सोमारू उसेंडी की सफलता बताती है कि शासकीय योजनाओं का सही लाभ, विभागीय मार्गदर्शन और मेहनत मिलकर दूरस्थ क्षेत्रों में भी ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति बदल सकते हैं। मत्स्य पालन से प्राप्त अतिरिक्त आय ने उनके परिवार को आर्थिक संबल देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार का अवसर भी उपलब्ध कराया है।
छत्तीसगढ़ में मत्स्य विभाग द्वारा पात्र मछुआरों, अनुसूचित जनजाति वर्ग सहित हितग्राहियों को नाव-जाल, मत्स्य बीज और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराकर मत्स्य पालन को आय और रोजगार के स्थायी साधन के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। अबूझमाड़ के सोमारू राम उसेंडी की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।
