देश की अर्थव्यवस्था में राज्यों का दम, आय में महाराष्ट्र और उत्पादन में गुजरात आगे

नई दिल्ली। देश के औद्योगिक परिदृश्य को दर्शाती एक हालिया आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कारखानों की कुल संख्या के मामले में तमिलनाडु शीर्ष पायदान पर है, जबकि कुल औद्योगिक उत्पादन के पैमाने पर गुजरात देश में सबसे आगे बना हुआ है। वहीं, राष्ट्रीय आय और सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) में योगदान देने के मामले में महाराष्ट्र प्रथम स्थान पर काबिज है। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि यद्यपि देश में छोटे कारखानों की संख्या का प्रतिशत अधिक है, किंतु कुल औद्योगिक पूंजी का लगभग 79.59 प्रतिशत हिस्सा बड़े उद्योगों के पास केंद्रित है।
देशभर के कारखानों में रोजगार और उत्पादन का आंकड़ा
वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2024-25 की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर के कुल 2.18 लाख पंजीकृत कारखानों में लगभग 2.10 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। आंकड़ों के आधार पर एक औसत कारखाना लगभग 96 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करता है। इसमें औसतन 2,339 लाख रुपये की स्थायी पूंजी लगी होती है, जो सालाना 7,561 लाख रुपये मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का विनिर्माण करता है। इस पूरी प्रक्रिया से राष्ट्रीय आय में प्रति कारखाना 1,052 लाख रुपये का शुद्ध मूल्य संवर्धन दर्ज किया जाता है।
कर्मचारियों का पारिश्रमिक और विनिर्माण क्षेत्र का समन्वय
समीक्षाधीन अवधि के दौरान देश के इन तमाम विनिर्माण कारखानों ने अपने कर्मचारियों और श्रमिकों को कुल 8.03 लाख करोड़ रुपये का पारिश्रमिक वितरित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए तमिलनाडु के सुदृढ़ कारखाना नेटवर्क, गुजरात की विशाल निवेश व उत्पादन क्षमता और महाराष्ट्र की उच्च औद्योगिक उत्पादकता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना अनिवार्य है। इसके साथ ही भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु छोटे कारखानों को किफायती दरों पर पूंजी, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना बेहद जरूरी है।
प्रमुख क्षेत्रों का योगदान और रोजगार का ढांचा
देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में खाद्य उत्पाद उद्योग का दबदबा स्पष्ट रूप से नजर आता है, जो अकेले उत्तर प्रदेश के कुल औद्योगिक उत्पादन में 22.02 फीसदी का योगदान देता है। देश के कुल खाद्य उत्पादन में उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की सम्मिलित हिस्सेदारी 37.61 प्रतिशत है। दूसरी ओर, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद उद्योग के कुल उत्पादन में गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश मिलकर 56.31 प्रतिशत का बड़ा योगदान देते हैं। रोजगार प्रदान करने के मामले में खाद्य उत्पाद उद्योग 11.24 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है, जबकि कपड़ा उद्योग 8.37 फीसदी और बुनियादी धातु उद्योग 7.54 फीसदी हिस्सेदारी के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
सकल मूल्य संवर्धन में विभिन्न उद्योगों की भागीदारी
सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) के मोर्चे पर बुनियादी धातु उद्योग 11.58 प्रतिशत योगदान के साथ शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। इसके उपरांत मोटर वाहन निर्माण उद्योग का योगदान 9.54 प्रतिशत और रसायन तथा रासायनिक उत्पादों का योगदान 8.45 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके अतिरिक्त फार्मास्यूटिकल उद्योग 8.08 फीसदी और खाद्य उत्पाद क्षेत्र 7.87 फीसदी के साथ अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन प्रमुख छह उद्योगों ने मिलकर देश के कुल सकल मूल्य संवर्धन में 52.41 प्रतिशत का भारी-भरकम योगदान दिया है, जबकि देश की कुल स्थायी औद्योगिक पूंजी में भी इनकी हिस्सेदारी 50.01 प्रतिशत रही है।
