बेटी के बेहतर भविष्य की उम्मीद में सऊदी गई स्वीटी अख्तर, मिली मौत की सजा

ढाका। बांग्लादेश की स्वीटी अख्तर को सऊदी अरब में फांसी दिए जाने की खबर से उनका परिवार गहरे सदमे में है। बेटी के बेहतर भविष्य की उम्मीद में विदेश गई स्वीटी की मौत से महज एक दिन पहले उसके पिता से बात हुई थी, लेकिन उन्हें इस दर्दनाक अंत का जरा भी अहसास नहीं था। परिवार को इस फांसी की जानकारी अन्य लोगों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के जरिए मिली।

जेल में रहते हुए पिता से की थी आखिरी बात

सऊदी जेल में रहने के दौरान भी स्वीटी अपने परिवार से संपर्क में थी, लेकिन उसने कभी मुकदमे की गंभीरता या मौत की सजा का जिक्र नहीं किया। 13 अक्टूबर को मगरिब की नमाज के बाद पिता से हुई अंतिम बातचीत में स्वीटी ने उम्मीद जताई थी कि वह दो महीने के भीतर रिहा होकर घर लौट आएगी। हालांकि, 14 अक्टूबर को स्वीटी और नाजरुल इस्लाम को फांसी दिए जाने की खबर अचानक सामने आ गई।

बांग्लादेश में गहराया आक्रोश, शव वापसी की गुहार

इस घटना ने बांग्लादेश में भारी नाराजगी पैदा कर दी है, क्योंकि सऊदी अरब स्थित बांग्लादेशी राजनयिक मिशन को इस कार्रवाई की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। बांग्लादेश सरकार ने सऊदी अधिकारियों से न्यायिक कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। स्वीटी की मां जोहोरा बेगम ने अपनी बेटी का शव अंतिम दर्शन के लिए स्वदेश लाने की गुहार लगाई है।

अभावों और संघर्षों से भरा रहा जीवन

मार्च 2023 में, एक पंजीकृत भर्ती एजेंसी के जरिए स्वीटी सऊदी अरब पहुंची। उसे भेजने के लिए उसके पिता ने 1.5 लाख टका का कर्ज लिया था, इस उम्मीद में कि बेटी पैसे कमाकर परिवार का सहारा बनेगी। सऊदी अरब पहुंचने के बाद स्वीटी मक्का की ग्रैंड मस्जिद में सफाईकर्मी के तौर पर काम करने लगी और शुरुआती पांच-छह महीनों तक उसने अपने परिवार को पैसे भेजे।हालांकि, अगस्त 2023 में उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। 2 अगस्त 2023 को स्वीटी को व्यभिचार के आरोपों में हिरासत में लिया गया। उसके साथ काम करने वाले एक अन्य बांग्लादेशी नागरिक नाजरुल इस्लाम अब्दुल बासिर को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया गया था। स्वीटी ने अपने परिवार को बताया था कि उसे कुछ महिला सहकर्मियों द्वारा कथित तौर पर अवैध तरीके से कार खरीदने के मामले में फंसाया गया है। उसके रिश्तेदारों को भी आशंका थी कि उसे गलत तरीके से इस मामले में उलझाया गया था।

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