बिहार में TET फर्जीवाड़े का खुलासा, दूसरे के रोल नंबर पर बन गए शिक्षक; दो पर FIR

बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले में सरकारी विद्यालय में शिक्षक की नौकरी हासिल करने के लिए फर्जी टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) प्रमाणपत्र का इस्तेमाल करने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में सामने आया कि शिक्षक द्वारा लगाए गए अंकपत्र का रोल नंबर वास्तव में किसी अन्य अभ्यर्थी के नाम पर दर्ज था। इस खुलासे के बाद बखरी थाने में दो शिक्षकों सहित अन्य अज्ञात लोगों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। निगरानी विभाग की इस कड़ी कार्रवाई से शिक्षा विभाग और शिक्षक संवर्ग में भारी हड़कंप मच गया है।
मोहनपुर पंचायत के दो विद्यालयों से जुड़ा है फर्जीवाड़े का मामला
यह पूरा मामला बखरी प्रखंड अंतर्गत मोहनपुर पंचायत के दो नवसृजित प्राथमिक विद्यालयों से संबंधित है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में कारीलाल सिंह नवसृजित प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक अपरजीत कुमार और साधुदेव सदा टोल प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक राजीव रंजन पांडेय को मुख्य आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इन्होंने जाली और कूटचरित दस्तावेजों को असली दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत कर सरकारी शिक्षक पद और वेतन का अवैध लाभ उठाया।
बोर्ड सत्यापन में खुली पोल: 84 अंक और पास का दावा, असल रिकॉर्ड में फेल निकली छात्रा
निगरानी ब्यूरो द्वारा की गई जांच के क्रम में शिक्षक अपरजीत कुमार के नियोजन से संबंधित वर्ष 2011 के बिहार प्रारंभिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (बीईटीईटी) अंकपत्र को सत्यापन के लिए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बीएसईबी), पटना भेजा गया था। शिक्षक के दस्तावेज में 84 अंक दर्शाते हुए परीक्षा उत्तीर्ण होने का उल्लेख था। हालांकि, बोर्ड से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाली विसंगति उजागर हुई। बोर्ड के मूल अभिलेखों के अनुसार, संबंधित रोल नंबर अपरजीत कुमार का न होकर बुलबुल कुमारी (पिता विश्वनाथ धारी) के नाम पर पंजीकृत पाया गया। इसके अतिरिक्त, बोर्ड के रिकॉर्ड में उक्त अभ्यर्थी 55 अंक के साथ अनुत्तीर्ण दर्ज थी। इस प्रकार फेल छात्रा के रोल नंबर का उपयोग कर कूटचरित अंकपत्र तैयार किया गया था।
वर्ष 2015 में हुआ था नियोजन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह की तलाश
निगरानी की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों शिक्षकों का नियोजन वर्ष 2015 में पंचायत शिक्षक के तौर पर हुआ था। प्राथमिकी दर्ज होने के उपरांत अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल में जुट गई हैं कि एक दशक पुराने इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड कौन था, यह जाली अंकपत्र किसने तैयार किया और उस समय नियोजन व सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े किन-किन अधिकारियों या दलालों की इसमें मिलीभगत थी। पुलिस ने प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर साक्ष्य संकलन और संबंधित आरोपियों के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
