2011 से फरार चल रहा लूट-हत्या का आरोपी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ा

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में क्राइम ब्रांच की विशेष टीम ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक व्यापारिक एजेंट से साढ़े आठ लाख रुपये की लूट और उनकी निर्मम हत्या के मामले में विगत डेढ़ दशक से फरार चल रहे एक शातिर अपराधी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। पकड़ा गया वांछित अभियुक्त बिहार के सहरसा जिले का निवासी नौशाद उर्फ लड्डू उर्फ कमारे आलम है। आरोपी की गिरफ्तारी पर दिल्ली पुलिस की ओर से 10 हजार रुपये का नकद पुरस्कार घोषित किया गया था, जिसे पुलिस लगातार तलाश कर रही थी।
व्यापारी की गोली मारकर हत्या और नकदी से भरा बैग लूटने का सनसनीखेज मामला
क्राइम ब्रांच के उपायुक्त हर्ष इंदौरा द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह घटना मार्च 2011 की है, जब लक्ष्मी नगर स्थित मंगल बाजार सड़क पर खून से लथपथ अवस्था में अतुल जैन नामक व्यक्ति का शव मिला था। तफ्तीश में सामने आया कि मृतक गांधी नगर कपड़ा बाजार में कमीशन एजेंट के रूप में कार्यरत थे और दैनिक कार्य के उपरांत नकदी एकत्र कर घर लौट रहे थे। वारदात वाले दिन जब वे साढ़े आठ लाख रुपये से भरा थैला लेकर जा रहे थे, तभी अरशद द्वारा रची गई साजिश के तहत नौशाद और उसके अन्य साथियों ने पिस्टल की नोक पर उन्हें घेर लिया और विरोध करने पर गोली मारकर नकदी लूट ली थी।
चार अभियुक्तों को कोर्ट से सजा के बावजूद लंबे समय से पहचान छिपाकर चकमा दे रहा था मुख्य आरोपी
इस जघन्य हत्याकांड के संदर्भ में पुलिस ने पूर्व में ही चार सह-अभियुक्तों को गिरफ्तार कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था, जहाँ से उन्हें दोषी भी ठहराया जा चुका है। हालांकि वारदात का मुख्य आरोपी नौशाद लगातार अपने ठिकाने बदल-बदल कर कानूनी कार्रवाई से बचता रहा। आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने के लिए पुलिस उपायुक्त के निर्देश पर इंस्पेक्टर विनय कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया, जिसने आरोपी की गतिविधियों पर बारीक नजर रखनी शुरू की।
शास्त्री पार्क फ्लाईओवर के समीप बिछाए गए जाल में फंसा भगोड़ा, साप्ताहिक बाजार में लगाता था दुकान
विशेष जांच दल को गुप्त सूचना मिली कि लगातार अपनी पहचान बदलकर छिप रहा आरोपी शास्त्री पार्क फ्लाईओवर के पास किसी से मिलने आने वाला है। प्राप्त सटीक सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने रणनीतिक घेराबंदी करते हुए आरोपी को धर दबोचा। कड़ी पूछताछ में यह बात सामने आई कि गिरफ्तारी और पुलिस की पैनी नजर से बचने के लिए आरोपी राजधानी के विभिन्न इलाकों में लगने वाले साप्ताहिक हाट-बाजारों में पुराने वस्त्र बेचने का काम कर रहा था।
