बिहार के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, कोलकाता भगदड़ में पिता-पुत्र की गई जान

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड अंतर्गत राजेपुर थाना क्षेत्र के पिपरा राघव गांव के रहने वाले अड़तीस वर्षीय अभिषेक कुमार श्रीवास्तव एक प्राइवेट दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के पद पर कार्यरत थे। नवरात्रि के अवसर पर तीन दिनों का अवकाश लेकर वह अपनी पत्नी निभा कुमारी और अपने बेटे आयुष के साथ पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दर्शन करने के लिए गए थे।

पंडाल में दर्शन के दौरान मची भगदड़

पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अभिषेक अपने परिवार के साथ गत सोलह अक्टूबर को कोलकाता पहुंचे थे। इसके अगले दिन यानी सत्रह अक्टूबर को सप्तमी की संध्या के समय पूरा परिवार महानगर के प्रसिद्ध दुर्गा पूजा पंडालों का दीदार करने निकला हुआ था। इसी दौरान कोलकाता के चोरबागान क्षेत्र में अचानक मूसलाधार वर्षा शुरू हो गई, जिसके परिणामस्वरुप वहां अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। इस भीषण हादसे की चपेट में आने से अभिषेक और उनके मासूम बेटे आयुष की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनकी अर्धांगिनी निभा गंभीर रूप से घायल हो गईं।

बेटे को सीने से चिपकाए हुए थी अंतिम सांस

शोकसंतप्त परिजनों ने बताया कि जब यह भगदड़ मची, उस वक्त अभिषेक ने अपने लाडले बेटे को अपने सीने से मजबूती से गले लगा रखा था। इस भयंकर भगदड़ के बीच दोनों गंभीर रूप से आहत हो गए और समूचे घटनाक्रम में कुल उन्नीस लोगों के काल के गाल में समाने की दुःखद सूचना सामने आई है। कोलकाता में यह परिवार अपने परिचित राजेश कुमार श्रीवास्तव के यहां ठहरा हुआ था, जो उत्तर चौबीस परगना जिले के पानीहाटी नगरपालिका क्षेत्र में रहते हैं। इस दुर्घटना में यजमान राजेश भी घायल हो गए जिनके सीने में चोट आने के साथ ही पसली में फ्रेक्चर हुआ है, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया था।

एक ही परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक अभिषेक के छोटे भाई अंकित कुमार श्रीवास्तव, जो कि गुवाहाटी में निवास करते हैं, ने बताया कि घटना से दो दिन पूर्व ही उनके बड़े भाई ने उन्हें कोलकाता जाने के बारे में फोन पर बताया था। परिवार अभी मात्र एक माह पूर्व अपनी माता के निधन के शोक से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि इस वीभत्स हादसे ने हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ कर रख दिया। वृद्ध पिता बिंदेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव अपने पुत्र और पौत्र को खोने के बाद सुधबुध खो बैठे हैं और उनका रो-रोकर बेहद बुरा हाल है, क्योंकि अभिषेक ही उनके बुढ़ापे का सबसे बड़ा और इकलौता सहारा था।

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