22 मरीजों की मौत के बाद भी चलता रहा इलाज, तीन अस्पतालों ने वसूले 2 करोड़

मुंबई। महाराष्ट्र में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के नाम पर एक बड़ा और चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। नासिक के तीन अस्पतालों पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान जान गंवा चुके मरीजों के जाली मेडिकल रिकॉर्ड तैयार कर सरकार से करोड़ों रुपये की चपत लगाई।

कोरोना काल के मृतकों के नाम पर फर्जी क्लेम

नासिक के तीन अस्पतालों द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान दम तोड़ चुके 22 मरीजों के फर्जी दस्तावेज बनाए गए। आयुष्मान भारत योजना और महात्मा ज्योतिराव फुले जनआरोग्य योजना के तहत इन मृत लोगों को जीवित बताकर इलाज के झूठे दावे पेश किए गए। इन फर्जी क्लेम के माध्यम से सरकारी खजाने से लगभग दो करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि अवैध रूप से हड़प ली गई। इस गंभीर मामले में मुंबई के वर्ली पुलिस थाने में अस्पतालों के संचालकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है।

विधानसभा में उठा था मामला, एसआईटी गठित

इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब विधायक डॉ. राहुल आहेर ने महाराष्ट्र विधानसभा के सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत जांच के सख्त निर्देश दिए। इसके बाद विभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम की देखरेख में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया, जो अब दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रियाओं की बारीकी से पड़ताल कर रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर भी संदेह

विशेष जांच दल इस बात की गहराई से छानबीन कर रहा है कि इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने में किन-किन लोगों की मिलीभगत थी। जांच के दौरान यह बात भी सामने आ रही है कि इस अवैध रैकेट में केवल अस्पताल संचालक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।

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