अमेरिका-ईरान संबंधों पर ट्रंप की दो टूक, कतर बैठक में दिया बड़ा संदेश

एवियन। फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई है। इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान ईरान के साथ हाल ही में हुए नए रणनीतिक समझौते पर विशेष रूप से चर्चा की गई। बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी प्रशासनिक नीति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए दृढ़ शब्दों में कहा कि अमेरिका, ईरान के भीतर एक भी पैसा निवेश नहीं करने जा रहा है। गौरतलब है कि इससे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने आपसी सहमति से तैयार इस शांति समझौते के मसौदे पर डिजिटल माध्यम से अपने हस्ताक्षर दर्ज किए हैं।
जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर के बाद सामने आएगा पूरा मसौदा
इस बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय समझौते को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि इस संधि के सभी गुप्त पहलुओं और संपूर्ण विवरण को शुक्रवार को जिनेवा में होने वाले मुख्य समारोह के बाद ही पूरी दुनिया के सामने सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने इस आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
समारोह में राष्ट्रपति ट्रंप की मौजूदगी अभी तय नहीं
जहां एक ओर उपराष्ट्रपति वेंस का जिनेवा जाना पूरी तरह सुनिश्चित हो चुका है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी व्यक्तिगत भागीदारी को लेकर सस्पेंस बरकरार रखा है। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि इस मुख्य हस्ताक्षर समारोह में उनकी स्वयं की भौतिक उपस्थिति अभी तक निश्चित नहीं हो पाई है और इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना अभी बाकी है।
वैश्विक मंच पर शांति समझौते के दूरगामी परिणाम
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजिटल हस्ताक्षर के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें शुक्रवार को होने वाले औपचारिक कार्यक्रम पर टिकी हुई हैं। खाड़ी देशों में शांति और स्थिरता स्थापित करने के उद्देश्य से किए जा रहे इस समझौते को वैश्विक राजनीति के लिहाज से एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है। कतर के अमीर के साथ हुई इस ताजा बैठक से यह भी साफ हो गया है कि अमेरिका भले ही शांति स्थापित करने के पक्ष में है, लेकिन वह ईरान को किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता या निवेश देने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
