सुप्रीम कोर्ट के बाद ट्रंप की नई रणनीति, टैरिफ मुद्दे पर राज्यों से आर-पार की लड़ाई

वाशिंगटन। अमेरिका में आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर एक बार फिर बड़ा कानूनी और राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए टैरिफ के विरोध में देश के 25 राज्यों ने एकजुट होकर संघीय अदालत में याचिका दायर की है। राज्यों का आरोप है कि सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा जिस आयात शुल्क नीति को अवैध घोषित किया जा चुका था, प्रशासन अब कानून के दूसरे रास्तों का इस्तेमाल कर उसे ही फिर से लागू करने की कोशिश कर रहा है।
न्यू यॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत में हार का सामना करने के बावजूद प्रशासन अमेरिकी परिवारों और व्यवसायों पर नया वित्तीय बोझ डाल रहा है, जो सीधे तौर पर कानून की मूल भावना के खिलाफ है।
59 देशों और यूरोपीय संघ पर लगाया नया शुल्क
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में 59 देशों और यूरोपीय संघ से आयात होने वाली वस्तुओं पर 10% से 12.5% तक का नया टैरिफ लागू किया है। व्हाइट हाउस ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम उन देशों के खिलाफ आवश्यक था, जो बंधुआ व जबरन श्रम (Forced Labor) से बने सामान के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद रणनीति में बदलाव
गौरतलब है कि इसी वर्ष फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि वर्ष 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को व्यापक स्तर पर टैरिफ थोपने का अधिकार नहीं है। उस फैसले के बाद सरकार को कई आयातकों से वसूला गया पुराना शुल्क वापस करना पड़ा था।
इसके बाद लागू किए गए 10% अस्थायी वैश्विक टैरिफ की अवधि भी 24 जुलाई की मध्यरात्रि को समाप्त हो गई। इस कानूनी अड़चन से निपटने के लिए अब ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 (Section 301) का सहारा लिया है।
क्या है धारा 301 (Section 301)?
अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 राष्ट्रपति को उन देशों के खिलाफ कठोर आयात शुल्क व व्यापारिक प्रतिबंध लगाने की शक्ति देती है, जो अमेरिका के खिलाफ अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापार नीतियां अपनाते हैं। अपने पहले कार्यकाल में भी ट्रंप ने चीन पर भारी टैरिफ लगाने के लिए इसी प्रावधान का प्रयोग किया था, जो कानूनी समीक्षाओं में भी निष्प्रभावी नहीं हुआ था।
व्हाइट हाउस का पक्ष बनाम राज्यों की दलील
व्हाइट हाउस का रुख: प्रवक्ता कुश देसाई ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने वैधानिक अधिकारों का उचित उपयोग कर रहा है। जबरन श्रम से बने उत्पादों को न रोक पाने वाले देशों के कारण अमेरिकी उद्योगों और श्रमिकों को नुकसान झेलना पड़ता है, इसलिए धारा 301 के तहत कार्रवाई पूरी तरह वैध है।
राज्यों की चिंता: याचिकाकर्ता राज्यों का कहना है कि प्रशासन केवल कानूनी आधार बदलकर पुराने अवैध फैसले को ही नया रूप दे रहा है। इससे वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे, महंगाई पर दबाव बढ़ेगा और आम उपभोक्ताओं व कंपनियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था और राजनीति पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कानूनी जंग लंबी खिंचने से अमेरिकी व्यापारिक माहौल में अनिश्चितता का माहौल बनेगा और आयात-निर्यात से जुड़ी कंपनियों के लिए परिचालन लागत का आकलन करना कठिन हो जाएगा।
दूसरी ओर, ट्रंप समर्थकों का मानना है कि सख्त आयात शुल्क से घरेलू विनिर्माण (Manufacturing) को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ऐसे समय में जब व्यापार नीति अमेरिका में एक प्रमुख राजनीतिक और चुनावी मुद्दा बनी हुई है, अदालत का यह आगामी फैसला ट्रंप प्रशासन की आर्थिक रणनीति की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगा।
