यूपी में गुटखा विज्ञापन पर कोर्ट सख्त, क्रिकेटरों की ब्रांडिंग पर उठे सवाल

लखनऊ|हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गुटखा कंपनियों के प्रचार से जुड़े मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण द्वारा समय पर जवाब दाखिल न करने पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने प्राधिकरण घर 5500 रुपये का हर्जाना लगाया है, जो याची को अदा किया जाएगा।न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिया। अदालत ने 25 नवंबर 2025 को ही प्राधिकरण से पूछा था कि वर्ष 2023 में याची की ओर से दिए गए प्रत्यावेदन पर अब तक जांच लंबित क्यों है। प्राधिकरण की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जवाबी हलफनामा लगभग तैयार है और जल्द दाखिल कर दिया जाएगा।

हालांकि, अदालत इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हुई। याचिका में गुटखा कंपनियों के साथ-साथ क्रिकेटर कपिल देव, सुनील गावस्कर, वीरेंद्र सहवाग, क्रिस गेल तथा अभिनेता अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, अक्षय कुमार, अजय देवगन, सलमान खान, ऋतिक रोशन, टाइगर श्रॉफ, सैफ अली खान और रणवीर सिंह को भी प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि ये हस्तियां, जो पान मसाला कंपनियों का प्रचार कर रही हैं, उनमें से कई पद्म पुरस्कार से सम्मानित हैं। उनके ऐसे विज्ञापनों से समाज में गलत संदेश जाता है और ये उपभोक्ता कानूनों का उल्लंघन भी करते हैं। 

हाईकोर्ट ने वकीलों की बीमा योजना पर मांगा जवाब

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के लगभग 2.50 लाख वकीलों के सामूहिक बीमा मामले में राज्य सरकार, यूपी बार काउंसिल समेत अवध बार एसोसिएशन से जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित कर इन पक्षकारों को सुझाव के साथ पक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने बुधवार को यह आदेश स्वयं संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर दिया।

32 फर्जी विवि के खिलाफ जनहित याचिका खारिज

देश में कथित रूप से चल रहे 32 फर्जी विश्वविद्यालयों केमा खिलाफ करवाई की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बुधवार को खारिज कर दिया। कोर्ट ने याची अधिवक्ता को मामले में समुचित रिसर्च के बाद याचिका दाखिल करने की अनुमति दी है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा दाखिल याचिका पर दिया। याची का कहना था कि देश में 32 फर्जी विवि चल रहे हैं। इनमें से चार उत्तर प्रदेश में हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याची से पूछा कि क्या उसने मामले में खुद समुचित जांच पड़ताल की है। याची इसका उत्तर नहीं दे सका। इसपर याची द्वारा याचिका वापस लेने के आधार पर कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

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