ईरान युद्ध में अमेरिका की बढ़ती मुश्किलें, मिसाइल भंडार घटे; कमांडरों ने दी सतर्क रहने की सलाह

वाशिंगटन। ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव का असर अब सीधे तौर पर अमेरिका की आंतरिक स्थिति पर देखने को मिल रहा है। वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य कमांडरों की सलाह पर ईरान पर जारी हवाई हमले रोक दिए गए हैं। दूसरी ओर, रक्षा हथियारों की घटती संख्या, जनता के बढ़ते विरोध और पेंटागन के आंकड़ों पर उठ रहे सवालों के कारण अमेरिकी प्रशासन पर दबाव काफी बढ़ गया है।
सैन्य कमांडरों की सलाह पर रोके गए हमले
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लगातार दो हफ्तों तक चले हमलों के बाद सेंटकॉम के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने व्हाइट हाउस को सूचित किया कि निर्धारित सैन्य लक्ष्यों को पहले ही नष्ट किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका बड़े स्तर पर युद्ध नहीं चाहता, तो रोजाना हमले जारी रखने से कोई विशेष लाभ नहीं होगा। इसी परामर्श के आधार पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज क्षेत्र में कार्रवाई रोकने का निर्णय लिया। इसके साथ ही रक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पैट्रियट और थाड जैसी सुरक्षा मिसाइलों की कमी भविष्य में सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है।
युद्ध रोकने के पक्ष में अधिकांश अमेरिकी जनता
संघर्ष के पांचवें महीने में सामने आए सर्वेक्षणों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अधिकांश नागरिकों का मानना है कि यह युद्ध अनुमान से कहीं अधिक जटिल और कठिन साबित हुआ है। सर्वे में शामिल दो-तिहाई लोगों ने युद्ध को तुरंत समाप्त करने का समर्थन किया है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण ईंधन और पेट्रोल के दामों में वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।
सैनिकों के आंकड़ों को लेकर पेंटागन पर उठे सवाल
अमेरिकी रक्षा विभाग 'पेंटागन' पारदर्शिता को लेकर विवादों में घिर गया है। हताहत सैनिकों की सूची में अचानक 140 से अधिक घायल जवानों के नाम जोड़ने और 'ओवरसीज ऑपरेशंस' जैसी नई श्रेणी पेश करने पर सवाल उठ रहे हैं। सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सांसदों ने रक्षा मंत्री से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। सैन्य सलाह, हथियारों की कमी और जनता के असंतोष ने अमेरिका के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।
