अमेरिका का ईरान पर नया दांव, टैंकरों को निशाना बनाने की नीति से मची हलचल

वाशिंगटन। लगभग एक महीने की शांति के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर ईरानी हमलों को रोकने के उद्देश्य से 'टैंकर के बदले टैंकर' (Tanker for Tanker) रणनीति के तहत ईरान पर व्यापक हवाई और ड्रोन हमले शुरू किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं।

'टैंकर के बदले टैंकर' रणनीति और 100 ठिकानों पर प्रहार

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब अमेरिकी सेना ने सीधे ईरानी सरकार के तेल टैंकरों को निशाना बनाया है:

  • ईरानी टैंकरों पर हमला: अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी रेखा के उत्तर में खड़े ईरान सरकार के दो टैंकरों के इंजन रूम को अमेरिकी ड्रोन मिसाइलों ने निशाना बनाकर क्षतिग्रस्त कर दिया।

  • 100 सैन्य ठिकानों पर स्ट्राइक: मंगलवार को हुए हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लगभग 100 ठिकानों को तबाह किया गया। इनमें वायु रक्षा प्रणालियां, रडार नेटवर्क, खदान (माइन) बिछाने की क्षमता, संचार केंद्र, एंटी-शिप क्रूज मिसाइल लॉन्चर और अटैक ड्रोन साइट्स शामिल हैं।

  • रणनीतिक उद्देश्य: अमेरिका का मुख्य मकसद ईरान की उन रडार और मिसाइल क्षमताओं को पूरी तरह समाप्त करना है, जिनसे वह जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों और अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाता रहा है।

ईरान का जवाबी हमला और अमेरिकी डिफेंस द्वारा निष्क्रिय

अमेरिकी हमलों के प्रत्युत्तर में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से पलटवार किया:

  • बैलिस्टिक मिसाइलें विफल: ईरान द्वारा दागी गई 25 बैलिस्टिक मिसाइलों में से आधी ही जॉर्डन के हवाई क्षेत्र तक पहुंच सकीं। इनमें से 10 को वायु रक्षा प्रणालियों ने हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि 3 मिसाइलें बिना किसी नुकसान के खुले इलाकों में गिरीं।

  • ड्रोन हमले निष्प्रभावी: बहरीन, कुवैत और इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित अमेरिकी बेस की ओर भेजे गए अधिकांश ड्रोनों को भी रास्ते में ही मार गिराया गया।

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों ने होर्मुज क्षेत्र में ईरान की आक्रामक मारक क्षमता को गहरा आघात पहुंचाया है, जिससे वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरे का स्तर आगामी कम से कम एक महीने के लिए काफी घट गया है।

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