अमेरिकी सैनिकों को दी जा रही कब्रें तैयार करने की ट्रेनिंग, क्या है इसके पीछे की वजह?

वॉशिंगटन। अमेरिकी सेना ने एक ऐसी असामान्य तैयारी शुरू कर दी है जिसकी आवश्यकता कोरियाई युद्ध के बाद से इतने बड़े पैमाने पर कभी महसूस नहीं की गई थी। दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में शुमार अमेरिकी सेना अब युद्ध के मैदान में भारी संख्या में सैनिकों के हताहत होने की स्थिति में सामूहिक अस्थायी कब्रें तैयार करने का विशेष प्रशिक्षण ले रही है। इसके लिए बुलडोजर, भारी खुदाई करने वाली मशीनों और इंजीनियरिंग यूनिट्स को मैदान में उतारा गया है। इराक और अफगानिस्तान जैसे पिछले सैन्य अभियानों में इस स्तर पर कब्रों की व्यवस्था करने की जरूरत नहीं पड़ी थी।

सात दशक बाद शुरू हुआ विशेष अभ्यास

करीब सात दशक बाद शुरू हुए इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य युद्ध में अत्यधिक जनहानि की स्थिति में सैनिकों के शवों को सुरक्षित रखना, उनकी सटीक पहचान सुनिश्चित करना और संघर्ष थमने के बाद उन्हें उनके परिवारों तक सम्मानजनक तरीके से पहुंचाना है। हाल ही में अमेरिकी सेना की थर्ड कोर सस्टेनमेंट कमांड और इंजीनियर टीमों ने एक कड़ा अभ्यास पूरा किया, जिसमें नकली अवशेषों और भारी मशीनों का उपयोग करके लंबी खाइयां खोदी गईं। इस दौरान यह आकलन किया गया कि एक इंजीनियर कंपनी बिना रुके काम करते हुए चौबीस घंटे के भीतर चौबीस सौ शवों के लिए अस्थायी कब्रें तैयार कर सकती है। इस प्रशिक्षण में दो दशकों में पहली बार सेना के पादरियों को भी शामिल किया गया ताकि युद्ध के मैदान में बिना किसी विलंब के धार्मिक संस्कारों के साथ जमीन को पवित्र किया जा सके।

वैश्विक संघर्षों की आशंका और पेंटागन की रणनीति

यह अचानक उठाया गया कदम वैश्विक भू-राजनीतिक हालात में आए गंभीर बदलावों और भविष्य के बड़े संघर्षों की आशंका का स्पष्ट संकेत देता है। अमेरिकी सैन्य रणनीतिकारों का मानना है कि यदि चीन, रूस या ईरान जैसी महाशक्तियों के साथ कोई सीधा और बड़ा महायुद्ध छिड़ता है, तो युद्ध के शुरुआती दौर में ही हजारों सैनिकों के मारे जाने की आशंका है। ऐसी भीषण परिस्थितियों में हवाई क्षेत्र के बंद होने या परिवहन विमानों की भारी कमी के कारण हजारों शवों को तुरंत स्वदेश वापस भेजना असंभव साबित होगा।

बीमारियों से बचाव और 2027 की भावी योजना

युद्ध क्षेत्र में शवों को डीकंपोज होने और संक्रामक बीमारियों के फैलने से रोकने के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि उनकी पहचान दर्ज कर उन्हें सुरक्षित रूप से अस्थायी तौर पर दफनाया जाए, ताकि युद्ध समाप्ति के बाद उन्हें निकालकर स्वजनों को सौंपा जा सके। इस पूरी प्रक्रिया की गंभीरता को समझाते हुए सैन्य अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि इस तरह के कठोर प्रशिक्षण के बिना युद्ध के समय हालात से निपटना बेहद मुश्किल होगा। पेंटागन इस तैयारी को किसी छोटे-मोटे संघर्ष के बजाय उच्च क्षमता वाले पूर्ण पैमाने के पारंपरिक युद्ध की आशंका को ध्यान में रखकर उठाया गया एक जरूरी कदम मान रहा है। इस कड़ी में सेना का अगला चरण वर्ष 2027 में शुरू होगा, जिसमें उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और शवों के प्रबंधन से जुड़े अन्य पहलुओं का अभ्यास किया जाएगा।

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