दलाई लामा द्वारा मान्यता के तीन दिन बाद हो गए थे लापता: पंचेन लामा की रिहाई के लिए उठी वैश्विक आवाज

अमेरिका । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगामी उच्च-स्तरीय बैठकों और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अमेरिका यात्रा से पहले वैश्विक कूटनीति में तिब्बत का मुद्दा फिर से गर्मा गया है। अमेरिका एक ओर जहां चीन पर मानवाधिकारों और दलाई लामा के साथ बातचीत के लिए दबाव बना रहा है, वहीं कई तिब्बत समर्थक संगठनों ने भी अपनी मांगें तेज कर दी हैं।

11वें पंचेन लामा की रिहाई और तिब्बत समर्थक संगठनों की मांग

‘इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत’ (आईसीटी) समेत कुल 29 मानवाधिकार और तिब्बत समर्थक संगठनों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आग्रह किया है कि वे शी चिनफिंग के साथ बैठक के दौरान 11वें पंचेन लामा की रिहाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाएं।

  • गायब होने का इतिहास: दलाई लामा द्वारा 14 मई 1995 को मान्यता दिए जाने के महज तीन दिन बाद ही पंचेन लामा रहस्यमय तरीके से लापता हो गए थे।

  • पत्र और अपील: मानवाधिकार संगठनों द्वारा शी चिनफिंग को लिखे गए खुले पत्र में तिब्बतियों, उइगरों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की संस्कृति और पहचान को मिटाने के प्रयासों की कड़ी निंदा की गई है। साथ ही, पंचेन लामा सहित सभी राजनीतिक कैदियों की तत्काल रिहाई की मांग की गई है, या कम से कम अमेरिकी अधिकारियों को उनसे स्वतंत्र रूप से मिलने की अनुमति दिए जाने की वकालत की गई है।

अमेरिकी तिब्बत नीति और कूटनीतिक दबाव

आईसीटी की अध्यक्ष तेनचो ग्यात्सो के अनुसार, अमेरिका की तिब्बत नीति मुख्य रूप से ‘तिब्बतन पॉलिसी एक्ट, 2002’ और ‘रिजॉल्व तिब्बत एक्ट, 2024’ जैसे महत्वपूर्ण कानूनों द्वारा निर्देशित होती है। ये कानून चीन और तिब्बत के बीच बिना किसी पूर्व शर्त के सार्थक बातचीत की वकालत करते हैं। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि चीन का नया ‘जातीय एकता एवं प्रगति कानून’ तिब्बती पहचान के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है, इसलिए अमेरिकी नेतृत्व को इस मंच का उपयोग बीजिंग पर दबाव बनाने के लिए करना चाहिए। इस अधिनियम के तहत अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा तिब्बत के लिए एक विशेष समन्वयक की नियुक्ति की जाती है, जिसका उद्देश्य तिब्बतियों की स्वायत्तता और दलाई लामा के उत्तराधिकार के मुद्दे पर चीन को घेरना है। इसके अलावा, अमेरिका ने तिब्बत में विदेशी राजनयिकों, पत्रकारों और नागरिकों के लिए निर्बाध पहुंच की भी पुरजोर मांग की है।

चीन की कड़ी प्रतिक्रिया और संप्रभुता का दावा

दूसरी ओर, चीन ने अमेरिका के इस रुख और तिब्बत से जुड़े कदमों की तीखी निंदा की है। बीजिंग ने इसे अपने आंतरिक मामलों में घोर हस्तक्षेप करार देते हुए अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह तिब्बत से जुड़े मामलों में आगे हस्तक्षेप न करे। चीन का स्पष्ट रुख है कि तिब्बत उसके संप्रभु क्षेत्र का एक अभिन्न हिस्सा है। बहरहाल, चीनी राष्ट्रपति की यात्रा से ठीक पहले तिब्बत के मुद्दे का गरमाना अमेरिका और चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है।

 

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