क्या 2050 तक हर तीसरा भारतीय होगा मोटापे की चपेट में? जानें बचाव के आसान तरीके

मोटापा अब केवल शरीर का वजन बढ़ने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक विकराल वैश्विक स्वास्थ्य समस्या का रूप ले चुका है। भारत भी इस गंभीर चुनौती से जूझ रहा है। असंतुलित जीवनशैली, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, जंक फूड्स, कोल्ड ड्रिंक्स और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने देश में वजन बढ़ने के साथ-साथ कई अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ा दिया है।
भारत में मोटापे की चिंताजनक तस्वीर
वर्ष 2022 में प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'लैंसेट' में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारत में लगभग 4.4 करोड़ महिलाएं और 2.6 करोड़ पुरुष मोटापे की समस्या से ग्रसित थे। यदि मोटापे की मौजूदा रफ्तार इसी तरह जारी रही, तो आने वाले समय में यह आंकड़े और भी डरावने हो सकते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब यह समस्या केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के बच्चे और किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, मोटापे से प्रभावित बच्चों की संख्या के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है और अनुमान है कि देश के करीब 8.4 प्रतिशत बच्चे इस समस्या से प्रभावित हैं। बचपन का बढ़ता वजन भविष्य में डायबिटीज, उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) और हृदय रोगों जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को न्योता देता है।
मोटापे के मुख्य कारण और जीवनशैली की भूमिका
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार देशवासियों को मोटापा नियंत्रित करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूक करते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे केवल जरूरत से ज्यादा खाना या व्यायाम की कमी ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि हमारी पूरी रोजमर्रा की जीवनशैली इसमें अहम भूमिका निभा रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि वजन को नियंत्रण में लाने के लिए हमेशा किसी बेहद कठिन डाइट या जिम में घंटों पसीना बहाने की जरूरत नहीं होती, बल्कि छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव भी बड़ा असर दिखा सकते हैं।
वजन नियंत्रित रखने और स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये जरूरी कदम
संतुलित और पौष्टिक आहार: अपनी डाइट में विभिन्न प्रकार के ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, अंडे और हेल्दी फैट को शामिल करें। केवल भोजन की मात्रा कम करने के बजाय उसके पोषण और गुणवत्ता पर ध्यान देना ज्यादा फायदेमंद होता है।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं: शरीर को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है। मौसम और अपनी शारीरिक गतिविधियों के अनुसार पर्याप्त पानी पीने की आदत डालें।
नियमित शारीरिक सक्रियता: हफ्ते में कम से कम 150 मिनट शारीरिक गतिविधि या व्यायाम का लक्ष्य रखें। तेज चलना, साइकिल चलाना या तैराकी जैसी गतिविधियां वजन को नियंत्रित रखने में बेहद मददगार साबित होती हैं।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से दूरी: चिप्स, इंस्टेंट फूड, मिठाइयां और अन्य पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में अक्सर अत्यधिक कैलोरी, नमक और शुगर होती है। इन्हें रोज की आदत बनाने से बचें और सीमित मात्रा में ही सेवन करें।
क्रैश डाइटिंग से बचें: वजन घटाने के लिए लंबे समय तक भूखा रहना या खाना छोड़ना नुकसानदेह हो सकता है। इससे कमजोरी और बाद में जरूरत से ज्यादा खाने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। किसी भी विशेष फास्टिंग या डाइट के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
शुगर युक्त ड्रिंक्स कम करें: सोडा, मीठे पैकेज्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक्स और अन्य मीठे पेय शरीर में अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाते हैं। इन्हें कम करना वजन घटाने की दिशा में एक बेहतरीन कदम है।
तनाव और नींद का प्रबंधन: अत्यधिक तनाव के कारण कई लोगों में भावनात्मक रूप से अधिक खाने (इमोशनल ईटिंग) की आदत पड़ जाती है। इसके अलावा खराब नींद भी वजन नियंत्रण को मुश्किल बनाती है, इसलिए पर्याप्त नींद लें और तनाव को मैनेज करें।
