अपने स्वयं के अस्तित्व को बचाए रखने एवं श्रेष्ठ भाव पैदा करने वाली भाषा है हिन्दी – प्रो.सिंह 

भोपाल। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में दिनांक 03 से 17 सितम्बर, 2019 हिन्दी पखवाड़े का शुभारंभ द्वीप प्रज्वलित कर मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक एवं उच्च शिक्षा विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रह चुके प्रोफेसर (डॉ.) उमेश कुमार सिंह द्वारा किया गया। 
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150 वां जन्मशती वर्ष पर गांधी जी द्वारा भाषा के क्षेत्र में दिए गए योगदान के बारे में केंद्रित उद्घाटन समारोह के पश्चात, प्रो. सिंह ने 1844 में हिन्दी भाषा के प्रारंभ एवं गांधी जी तथा अन्य भाषा विषेषज्ञों के मर्म को बताते हुए कहा कि "संस्कृति कई जीवन की यात्रा है। इसे जागने का अवसर भाषा से मिलता है एवं ये वर्णमाला से प्रारंभ होता है। मनुष्य के जीवन में 05 चीजें होती है। उन्हें स्थाई बनाने के लिए भाषा, भूषा, भेषज, भजन एवं भोजन जो हमारे संस्कृति के बहिरंग है ये पांच चीजों को पकड़कर रखना एवं इसी अनुसार जीने से संस्कृति एवं भाषा संरक्षित होती है। इस हेतु महर्षि अरविंद का उदहारण दिया। अपने स्वयं के अस्तित्व को बचाए रखने एवं श्रेष्ठ भाव पैदा करने वाली भाषा है हिन्दी। हिन्दी के कारण महात्मा गांधी को राष्ट्र भाषा प्रचार समिति के अध्यक्ष पद से इस्तिफा देने की घटना एवं हिन्दी को राष्ट्र भाषा तथा राजभाषा बनाने के समय होने वाली सभी घटनाओं का उदाहरण सहित बताया। 
इस अवसर पर संग्रहालय के संयुक्त निदेशक, दिलीप सिंह ने कहा कि " बिना भाषा के कोई भी संस्कृति जिन्दा नहीं रहती है। उदरीकरण के दौर में संस्कृति एवं भाषा भी आयात हुए है। इसका प्रभाव हमें देखने को मिलता है। मध्य प्रदेश की मूल पहचान हिन्दी है, इसे समझना एवं संस्कृति से जोड़ना होगा”। 
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संग्रहालय के राजभाषा अधिकारी सुधीर श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथी का पुष्पगुच्छ से स्वागत कर उनके व्यक्तित्व एवं कृत्तित्व पर प्रकाश डाला एवं बताया कि "संग्रहालय में लगातार यह 32वां हिन्दी पखवाड़ा होगा पहला पखवाडा वर्ष 1988 में प्रारंभ किया गया था”। इस अवसर पर भारी मात्रा में दर्शक एवं संग्रहालय कर्मी उपस्थित थे।

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