पर्यूषण पर्व के शुभारंभ पर हुई क्षमा धर्म की आराधना

भोपाल। आज से जैन समाज के आत्म शुद्धि के महापर्व पर्यूषण की शुरूआत हुई। श्रद्धालुओं ने क्षमा धर्म की आराधना की। आज से 10 दिनों तक तप, त्याग और संयम की साधना में धर्मावलंबी लीन रहेंगे। चौक जैन धर्मशाला में आचार्यश्री विद्या सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री प्रसाद सागर महाराज, मुनिश्री शैल सागर महाराज, मुनिश्री निकलंक सागर महाराज के सानिध्य में प्रात: भगवान जिनेन्द्र का अभिषेक और संसार के सभी जीवों की कल्याण की भावना को लेकर मंत्रोचारित शांतिधारा की गई। मुनिसंघ के सानिध्य में पूजन प्रशिक्षण कार्यशाला 10 दिन चलेगी जिसमें श्रावकगण विशेष रूप से युवा, पूजा करने के धार्मिक, अध्यात्मिक और वैज्ञानिक स्वरूप के समझेंगे। इस अवसर पर आशीष वचन में मुनिश्री प्रसाद सागर महाराज ने कहा कि राग द्वेष रूपी आत्मा में रहने वाले कर्मों को तपाय, जलाय नष्ट करे वह पर्यूषण है। क्षमा धर्म का महत्व बताते हुये मुनिश्री ने कहा क्षमा, धर्म, विश्व शांति का प्रबल मंत्र है। क्रोध न करें इसी का नाम क्षमा है, क्षमा मांगने की नहीं स्वयं के अंदर उतारने की आवश्यकता है। जैसे रूप का आभूषण गुण है, गुण का आभूषण ज्ञान है, ज्ञान का आभूषण क्षमा है ऐसे क्षमा धर्म को हमें अपने जीवन में हरपल अपनाना है वर्तमान में जो विश्व व्यापी समस्यायें जड़वत हैं छोटी-छोटी बातों में अहम् के कारण एक देश दूसरे देश से युद्ध की बात सोचते हैं और धमकियां देने लगता है, क्षमा धर्म को अपनाने से यह समस्या स्वमेव ही दूर हो जायेगी। विश्व शांति के लिये प्रबल सूत्र है क्षमा धर्म।
मुनिश्री ने कहा क्रोध का शोध हो, क्षमा का बोध हो और उत्तम क्षमा मय हमारा उपयोग हो, यही धर्म का सार है। आत्मा को शुद्ध करने से पहले अपने मन के क्रोध कषाय को निकालो और मन को उत्तम क्षमा से भर लो तो आपका कल्याण निश्चित है। दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रमोद हिमांशु एवं ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों ने मुनिसंघ को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद लिया।
– पर की परिस्थिति को देखकर अपनी शक्ति को बिगाड़ने वाला सबसे बड़ा अज्ञानी है-आर्यका अक्षय ज्योति म.सा.
श्वेतांबर जैन मंदिर मारवाड़ी रोड में आर्यका अक्षय ज्योति म.सा. और निराग ज्योति म.सा. की शुभ निश्रा में तपस्वी रत्न साध्वी श्री रत्न ज्योति श्रीजी महाराज साहब का जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति से मनाया गया। इस अवसर पर सभी श्वेतांबर धर्मावलंबियों ने एक दूसरे से जाने-अनजाने में की गई गलतियों के लिये क्षमा याचना की। श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के अध्यक्ष राजेश तातेड ने सभी से सामूहिक क्षमायाचना की।
साध्वी अक्षय ज्योति म.सा. ने कहा कि मनुष्य के पास सबसे बड़ा दुख का कोई कारण है तो वह उसका अज्ञान है जिससे वह अपने आत्मिक सुख को भी देख नहीं पाता। स्वयं प्रसन्न रहते हुये उसे जानने का प्रयास करो। साध्वी मां ने कहा कि अज्ञान के साथ चलने वाले अज्ञानी का रास्ता बहुत लंबा होता है। उसे भव-भव में अनेक बार रोना पड़ता है। पर की परिस्थिति को देखकर अपनी शक्ति को बिगाड़ने वाला सबसे बड़ा अज्ञानी है। जबकि आत्मा में रहने वाला जीव ज्ञान स्वभावी होता है। जीने का हक उसके पास है जो जीने का समान रूप से अधिकार देता है। इस अवसर पर प्रसिद्ध फिजियो थेरेपिस्ट डॉ. अनंत सिंह ने विभिन्न मांसपेशियों और हड्डी संबंधी बीमारियों के बचाव व रोकथाम के उपाय बताये।
इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष राजेश तातेड, ललित नाहटा, दीपक भंडारी, सुजीत रामपुरिया, सुनील डोषी, दीपक मालू, नरेन्द्र बोथरा, सुबोध भंडारी, सुधीर भंडारी, श्वेतांबर महिला मंडल की चंदनबाला भंडारी, चंद्रकांत चोपड़ा, चचल बाई तातेड, प्रभा भंडारी सहित अनेक धर्मावलंबी मौजूद थे।
