आयुर्वेद के अनुसार विषम संयोग द्रव्य से हो जाता हैं विष

कुछ चीजें एक साथ मिलाकर खाने से या एक ही समय पर खाने से हमारे शरीर के लिए जहर का काम कर सकती हैं। इसलिए कुछ खाने की चीजों को एक समय पर एक साथ खाना कितना घातक हो सकता है, यह जान लेना बेहद जरूरी है । आयुर्वेद में —–
प्रकृति समसमवेत सिद्धांत —-तत्र खलवानेकारसेशु द्रव्यपनानेकदोषतमाकेषु च विकारेषु रसदोषप्रभावमेकैकश्येनाभिसमीक्ष्य ततो द्रव्याणविकारयोः प्रभात्तत्वं  व्यवस्येत (चरक विमानस्थं १/९
अनेक रस वाले द्रव्यों में,और अनेक दोषों से उतपन्न होने वाले रोगों में .रस के और दोष के प्रभाव को अलग अलग विचार कर द्रव्य और रोग के प्रभाव के तत्व का निश्चय करे .
तात्पर्य यह हैं की यदि मधुर  अम्ल और लवण रसों के प्रभाव (गुणों )का ज्ञान अलग अलग हैं तो उससे बनने वाला समुदाय का ज्ञान स्वतः हो जायेगा .जब ज्वर को दूर करने वाली अलग अलग चार औषधियां का परिज्ञान हैं तो उन चरों को मिलाकर यदि ज्वर में प्रयुक्त करें तो वह समुदाय भी ज्वरनाशक होगा .इस सिद्धांत को "प्रकृतिसमसमवेत" कहते हैं
न त्वेवं खलु सर्वत्र .हि विकृति विषमसमसमवेतानाम  नानात्मकानाम परस्परेण  चोपहतानाम्न्यैश्च विकल्पनैविलपित्तनाम व्यावपरभानुमनेनैव समुदायप्रभावतत्वमध्यवासातुरशक्यं ( चरक विमानस्थान१/१०)
किन्तु सब जगह ऐसा नहीं होता हैं क्योकि विकृति रूप मिले हुए एवं विषम रूप से मिले हुए अनेक प्रकार के आपस में उपघात को प्राप्त हुए और दूसरे भेद करने वाले उपायों से भिन्न हुए ,रसों के अवयव के प्रभाव के अनुमान से ही समुदाय के प्रभाव के तत्व का निश्चय शक्य नहीं हैं .
नानात्मकनाम -इसका तात्पर्य यह हैं की रस या दोषादि के नानारूप हेतु से उतपन्न होते हैं और उनमे भिन्न -भिन्न रूप और कारण के भेद होने से रस और दोष विकृतविषसमवेत होता  हैं .परस्परेण चोपहतनाम –परस्पर एक के गुण को नष्ट करने वाले कारण से ,वह कारण कहीं पर अदृष्टवश होते हैं वा एक प्रबल होता हैं वह दुर्बल रस के प्रभाव को मिटा देता हैं  .अन्यैश्च विकलनेविकल्पितानाम — भिन्न भिन्न कल्पना के भेद से गुणी में विषमता  आ जाती हैं .
उपरोक्त सिद्धांतों के आधार पर निम्मानुसार विषम संयोगो के कारण विषजन्य प्रभाव देखने मिलते हैं .
आयुर्वेद के अनुसार खाना और खाने के समय का सही से पालन करना बेहद लाभदायक साबित हुआ है। हमें पता भी नहीं चलता और ये खाना शरीर के अंदर जाकर हमें कई मायनों में बहुत नुकसान पहुंचाता है,नुकसानदायक बन सकते हैं ।
यह उस खराब हो गए या सड़े हुए खाने से कम नहीं है जो हम बचने के बाद या खराब होने के बाद बाहर फेंक देते हैं। जिस तरह से कभी-कभी यह खाना जानवरों को नुकसान पहुंचाता है, हमारे लिए भी उतना ही खतरनाक है।
आयुर्वेद सिखाता है स्वाद भी, सेहत भी
हमें खाने में अलग-अलग तरह की चीजें खाना बेहद पसंद होता है। चाहे वह एक साथ ही क्यों ना मिल जाए, लेकिन यह थोड़ा अटपटा लग सकता है क्योंकि कई ऐसी चीजें होती हैं, जो हम एक साथ नहीं खा सकते। अक्सर आपने लोगों को या स्पेशलिस्ट को यह कहते हुए सुना होगा कि एक साथ यह ना खाएं, एक साथ वह ना खाएं। इसका मतलब खाने में ऐसी कई चीजें होती हैं जो एक साथ या एक ही समय पर नहीं खाना चाहिए। कई चीजें तो ऐसी होती हैं जो एक साथ खाने से काफी नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।
घी और शहद:
घी और शहद कभी साथ में नहीं खाना चाहिए। यहां तक कि पानी में मिलाकर भी शहद और घी का सेवन नुकसानदेह हो सकता है। घी या तेल या मक्खन में शहद जहर बन जाता है। एक तो शहद की तासीर गर्म होती है। इसे किसी गर्म चीज के साथ नहीं खाना चाहिए नहीं, तो ये हमारे लिए पेट की समस्या पैदा कर देता है।
मीट व मछली के साथ भी शहद :
मीट व मछली के साथ भी शहद का सेवन नहीं करना चाहिए। शहद का इनके साथ सेवन करने से हमारे शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ जाते है। इससे दृष्टिहीनता व कानो पर भी असर हो सकता है और हमें सुनना भी बंद हो सकता है।
शहद और मूली:
शहद के साथ मूली का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे भी हमारे शरीर के टॉक्सिन्स बढ़ जाते हैं। इससे बॉडी पार्ट्स खराब  होने के चान्सेस ज्यादा बढ़ जाते हैं। इसलिए मूली के साथ शहद का सेवन कभी भी नहीं करना चाहिए।
शहद और दही:
शहद को कभी भी दही में मिलकर नहीं खाना चाहिए। इससे गैस, एलर्जी और किसी भी तरह की स्किन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा आप चीनी के साथ कभी भी शहद न खाये। चीनी के साथ शहद को खाना ऐसा होगा जैसे अमृत के साथ ज़हर को खाना।
इसके अलावा इन्‍हें भी एक साथ मिलाकर न खाएं:
मछली के साथ काली मिर्च कभी नहीं खानी चाहिए। मछली खाने के बाद काली मिर्च खाने से नुकसान होने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं।
तिल के साथ कभी भी पालक का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से डायरिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
10 दिन तक यदि कांसे के बर्तन में घी रख दी गई है, तो उसके बाद उस घी को नहीं खाना चाहिए।
पीले छतरी वाले मशरूम को सरसों के तेल में नहीं पकाना चाहिए और ना ही खाना चाहिए।
ठंडे पानी के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, खीरा, जामुन और मूंगफली कभी नहीं खानी चाहिए।
ये चीजें भी एक साथ हैं जहर समान
खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई और कठहल का सेवन कभी नहीं करना चाहिए।
पके हुए चावल के साथ सिरका नहीं खाना चाहिए। इसके परिणाम घातक हो सकते हैं।
दही और खट्टे फल एक साथ कभी नहीं खाने चाहिए। इसमें अलग-अलग एंजाइम मौजूद होते हैं, जिससे ये दोनों एक साथ पचाने में मुश्किल होता है।
अगर हम देखें तो दही और मछली की तासीर एकदम अलग अलग है, मतलब कि दही ठंडा है और मछली गरम होती है।
अक्सर लोगों को पूरी या पराठे के साथ दही खाना बेहद पसंद होता है, लेकिन तली और भुनी चीजों को दही के साथ नहीं खाना चाहिए। दही में मौजूद एंजाइम फैट को पचाने में दिक्कत पैदा करता है।
उपरोक्त आधार पर इस बात का विशेष ध्यान रखना अति आवश्यक हैं .अनजाने में कभी कभी हम असाध्य बीमारियों को निमंत्रित कर लेते हैं।
 

Leave a Reply