चिली ने निजी पहचान, इच्छा और मानसिक निजता को अधिकारों का दर्जा दिया

सेंटियागो । दुनिया के छोटे से दक्षिण अमेरिकी देश चिली ने निजी पहचान, इच्छा और मानसिक निजता को अधिकारों का दर्जा दिया गया है। ऐसा करने वाला चिली दुनिया का पहला देश बन गया है। न्यूरोटेक्नोलॉजी के जरिए किसी व्यक्ति को नियंत्रित करके कुछ करवाना इस कानून के तहत अपराध माना जाएगा। सांसद गीडो जिरार्डी ने कहा कि इसका मकसद इंसान की सोच की रक्षा करना है। न्यूरोटेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से इसकी सुरक्षा खतरे में है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये भविष्य में मानवाधिकारों की रक्षा का आधार बन सकता है। विशेषज्ञों को इस बात की चिंता है कि न्यूरोटेक्नोलॉजी को नियमित नहीं किया गया तो यह इंसान की सोचने की आजादी के लिए खतरा बन सकती है। अगर टेक्नोलॉजी सोचने से पहले ही दिमाग पढ़ने में सफल रहती है, तो यह ऐसी भावनाएं पैदा कर सकती है, जो वास्तव में हैं ही नहीं। इसके अलावा यह ब्रेन एक्टिविटी विश्लेषण कर उनमें हेर-फेर की ताकत भी रखती है। इसका इस्तेमाल आर्थिक फायदों के लिए हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि न्यूरोटेक्नोलॉजी फिलहाल विचार और भावनाएं डीकोड नहीं कर सकती। लेकिन एआई की मदद से ऐसा संभव हो सकता है। शक्तिशाली मशीन लर्निंग सिस्टम ब्रेन एक्टिविटी और बाहरी परिस्थितियों के बीच संबंध बना सकते हैं। इससे पहले शोधकर्ता ब्रेन एक्टिविटी से मशीन लर्निंग सिस्टम के जरिए क्रेडिट कार्ड के पासकोड का अनुमान लगाने में सफल रहे हैं। भविष्य में ये टेक्नोलॉजी अपग्रेड होगी तो दिमाग में मौजूद गोपनीय जानकारियां खतरे में पड़ सकती है।
अमेरिका और चीन जैसे देश एआई व न्यूरोसाइंस पर शोध में जुटे हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है, जिसका इस्तेमाल यादों को बदलने में हो सकता है। फेसबुक और न्यूरालिंक जैसी टेक कंपनियां इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही हैं। अमेरिकी कंपनी कर्नेल का हेडसेट रियल टाइम में ब्रेन एक्टिविटी रिकॉर्ड करता है। फेसबुक ने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस बनाने के लिए फंडिंग की है, जो यूजर्स को बिना बोले संवाद करने की सुविधा देगा। न्यूरालिंक ने बीते अप्रैल में एक वीडियो जारी किया, जिसमें एक बंदर कंपनी द्वारा लगाई गई चिप के जरिए दिमाग से गेम खेल रहा है। इसका अगला चरण इंसानों के दिमाग में इंप्लांट होने वाली चिप है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी के प्रोफेसर राफेल युस्ते के मुताबिक शोधकर्ता चूहों के मस्तिष्क में ऐसी चीजों की छवियां प्लांट करने में सफल रहे हैं, जो उन्हें पहले कभी नहीं देखी।

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