दिल्ली पुलिस लिंचिंग केस में पस्त:पहले गोकशी नहीं रोक पाए, बाद में सामने से निकल गए राजाराम के हत्यारे

नई दिल्ली   10 और 11 अप्रैल की दरमियानी रात दिल्ली के नजफगढ़ रोड स्थित गांव छावला में गोकशी के शक में राजाराम नाम के शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। 72 घंटे बाद भी आरोपी पकड़ से दूर हैं। चौंकानेवाली बात ये है कि आरोपियों को पकड़ने की बजाय दिल्ली पुलिस घटनास्थल से सबूत ही इकट्‌ठी करती रह गई और राजाराम की हत्या के आरोपी टहलते हुए अपने अपने रास्ते चले गए। वहीं जब हमने राजाराम के घरवालों से बात की, तो उन्होंने साफ कहा कि गोकशी से उनका कोई लेना-देना ही नहीं है। वे हिंदू हैं और गाय का महत्व जानते हैं।.दिल्ली का नजफगढ़ रोड, गांव- छावला। रविवार, रात 2 बजकर 10 मिनट। पुलिस को PCR पर कॉल आई, ‘शनि मंदिर के पास एक फार्म हाउस के अंदर गाय कट रही हैं, हम बाहर खड़े हैं।’ घटनास्थल पुलिस थाने से एक किमी से भी कम की दूरी पर है, लेकिन पुलिस को फार्म हाउस पहुंचने में करीब 45 मिनट लग गए। दिल्ली पुलिस की FIR के मुताबिक, पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची तो गोरक्षा दल दिल्ली के 15-20 कार्यकर्ता मौजूद थे और राजाराम नाम के शख्स के अलावा 3-4 और लोग घायल थे। पुलिस गोकशी से जुड़े सबूत इकट्ठा करने में लग गई और इतने में गोरक्षक दल के कार्यकर्ता वहां से नदारद हो गए। पुलिस देखती रह गई। बाद में इलाज के दौरान राजाराम की मौत हो गई। दिल्ली पुलिस की लापरवाही का ये वाकया है 10 और 11 अप्रैल की दरमियानी रात का। गोकशी का शक और फिर पीट-पीटकर हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने 2 FIR दर्ज की हैं। एक FIR कथित तौर पर गोकशी करने वालों के खिलाफ दर्ज की गई है, वहीं दूसरी FIR गोकशी के शक के आधार पर पीटने वालों पर दर्ज की गई है। अब तक पुलिस ने गोकशी के 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन वारदात के 72 घंटे बाद भी पीटने और हत्या के एक भी आरोपी को नहीं पकड़ा गया है।

फार्महाउस की देखभाल के साथ गाय पालता था राजाराम

वाकये के बाद हम राजाराम के रहने वाली जगह पर पहुंचे। संकरी सी गली से गुजरते हुए जब हम खंडहर जैसे दिख रहे फार्म हाउस के दरवाजे पर पहुंचे तो बाहर दिल्ली पुलिस के जवान खड़े थे। फार्महाउस में ही राजाराम जैसे-तैसे अपने परिवार के साथ गुजर-बसर कर रहा था। राजाराम की उम्र करीब 40 साल थी और वो मूल रूप से बिहार का रहने वाला था। रहने का ठिकाना इतना खस्ताहाल कि 2 मिनट ना रुका जा सके। परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे, दो बेटियां। राजाराम के पास 8 गायें हैं और पास के गांव में दूध बेचने के अलावा वह ई-रिक्शा भी चलाता था। ठिकाने पर पहुंचते ही हमें मिला- राजाराम का बेटा रोहित, उम्र- 15 साल। रोहित गायों की देखभाल कर रहा था और गायों को चराने के लिए पास के मैदान ले जा रहा था। रोहित खुद यहां से करीब 5 किलोमीटर दूर गोशाला में नौकरी करता है, जिसके बदले में उसे 7 हजार रुपये महीने की पगार मिलती है। गाय चराते हुए रोहित ने बताया ‘हम यादव हैं। मैंने बचपन से अब तक गायों की सेवा की है। मैं या मेरा बाप गाय को मारने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। हम कैसे गाय को मार देंगे। मुझे इस बात पर यकीन नहीं है कि मेरे पापा ऐसा कर सकते हैं। यकीन करना मुश्किल है कि ये सब हमारे साथ हुआ।’

‘हम खुद हिंदू हैं, हम कैसे गोकशी कर सकते हैं?’

राजाराम की पत्नी जसोदेवी की दो दिन से हालत खराब है। जब हम पहुंचे तो वो अस्पताल से दवा लेकर लौट रही थीं। हमने जैसे ही जसोदेवी से बात करनी शुरू की और उस रात का जिक्र किया तो वो फफक कर रोने लगीं। जसोदेवी बताती हैं, ‘उस शाम मैंने खाना खाया और टीवी देख रही थी। मेरे पति के पास कोई फोन आया, वो बाहर चले गए और मेरी नींद लग गई। जब मैं सुबह उठी तो घर पर पुलिस पहुंची हुई थी।’ अपने पति राजाराम पर गोकशी के आरोप के जवाब में जसोदेवी ने कहा- ‘हम सालों से गायों को पाल रहे हैं और आसपास के इलाके में दूध बेचते हैं।’ जसोदेवी, राजाराम और बच्चों के साथ 2 साल से इसी फार्महाउस में रह रही हैं। वो बताती हैं कि सुबह उन्हें पुलिस ने ही उठाया और उनका फोन ले लिया। अब तक उन्हें अपना फोन वापस नहीं मिला है। दूसरी तरफ इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक परिवार को राजाराम का शव भी नहीं मिला है।

मेन गेट के दाएं तरफ 2-3 गाय के सिर कटे हुए मिले: पुलिस

एक पुलिसवाले ने बताया, ‘रात को जब हम फार्महाउस पर पहुंचे तो वहां 10-15 लोग थे, जो खुद को गोरक्षक बता रहे थे। हमारी प्राथमिकता थी कि जो घायल हुए हैं, उनको पहले हॉस्पिटल पहुंचाया जाए और इसके बाद हमने अपनी जांच शुरू की। हमें मौका-ए-वारदात से गोकशी के बाद कुछ अवशेष भी मिले।’ FIR नंबर 220 के मुताबिक ‘पुलिस को फार्महाउस के गेट के दाएं तरफ 2-3 गायों के कटे हुए सिर मिले। वहीं फार्महाउस के बाहर छोटी साइज की लोडिंग गाड़ियां मिलीं।’

‘गोकशी के लिए 500-1000 रुपये में जगह देता था राजाराम’

FIR नंबर 221 के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के हसनपुर के रहने वाले मोहम्मद शानू ने पुलिस को बताया, ‘मैं फल बेचता हूं और कभी कभार पशु काटने का भी काम करता हूं। प्रवीण और राजाराम दोनों अलग-अलग गांव से गाय लेकर आते थे और हम सब यहां काटकर पैकिंग करके आगे भिजवा देते थे। इस काम के लिए राजाराम हमसे एक गाय का 500 रुपये लेता था। जब हम गायों को काट रहे थे, तभी अचानक 15-20 लोग वहां आ गए और फिर वो हमारी पिटाई करने लगे।’

आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की कई टीमें लगी

द्वारका के डिप्टी पुलिस कमिश्नर शंकर चौधरी ने मीडिया को बताया, ‘हमें 11 अप्रैल की रात को खबर मिली कि एक फार्महाउस पर गोकशी हो रही है। जब हमारी टीम पहुंची तो देखा कि पहले ही कुछ लोग वहां पहुंच चुके थे। हमने दोनों मामलों में FIR दर्ज की है। हमने आरोपियों को पकड़ने के लिए कई टीमों का गठन किया है और मैं व्यक्तिगत रूप से इस केस को देख रहा हूं।’ हमने जब DCP से पूछा कि पुलिस जब घटलास्थल पर पहुंची तो वहां लोगों की पिटाई करने वाले मौजूद थे और पुलिस ने उनको नहीं पकड़ा और जाने दिया? इस पर उन्होंने कहा, 'हमारी प्राथमिकता थी कि हम पहले घायलों को बचाते और उन्हें अस्पताल ले जाते। घटनास्थल पर कई सारे लोग मौजूद थे, कौन आरोपी था और कौन पुलिस को इत्तला देने वाला था, ये हमें नहीं पता था।'

Leave a Reply