भैयाजी जोशी का इंदौर आना और महाजन का चुनावी उम्मीदवारी से हटने की घोषणा करना!

क्या यह महज इत्तफाक है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी शुक्रवार को कुछ समय के लिए इंदौर पहुंचते हैं और आठ बार की सांसद स्पीकर सुमित्रा महाजन चुनावी राजनीति से अपने निर्गम मार्ग की सूचना सार्वजनिक करती हैं. महाजन ने स्वयं को टिकट की दावेदारी से क्यों हटाया.

दरअसल, इस बात को लेकर कई विचार हो सकते हैं कि आठ बार की सांसद और देश के पांच प्रमुख संवैधानिक पदो में से एक स्पीकर पद पर बैठी हुईं महाजन की एक्जिट एक सम्मान पूर्वक विदाई की हकदार थी. लेकिन यह खुले तौर पर मानना होगा कि 2 सीटों से 280 सीटों तक पहुंची भाजपा देश के 15 राज्यों तक पहुंची भाजपा, देश के 60 फीसदी लोगों पर काबिज भाजपा में अब बड़ा बदलाव आ चुका है.

एअर स्ट्राइक से बदला गणित

ओल्ड स्कूल अब बंद हो रहे हैं और नए पेशेवराना प्रबंधन से पार्टी चल रही है. 16 वी लोकसभा के समाप्त होने के बाद से ही स्पीकर महाजन ने अपने लोकसभा क्षेत्र में चुनावी तैयारियों का काम शुरू कर दिया था. पिछले पांच साल में उनकी सक्रियता बहुत कम देखी जा रही थी. वजह बताई जा रही थी उनका स्पीकर जैसे खास ओहदे पर होना. लेकिन पिछले दो महीनों में वे विधानसभा से लेकर मंडल तक वार्ड से लेकर बूथ तक अपने कार्यकर्ताओं के बीच देखी जा रही थीं.

पार्टी लीक पर चलना

संकेत साफ था कि वे अभी पार्टी के पितृपुरूष लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं के ग्रुप में शामिल होने के लिए बहुत लंबी वेटिंग में है. दरअसल इसके पीछे एक कारण स्वयं महाजन की व्यक्तिगत शैली को भी दिया जाता है. पार्टी अनुशासन की लीक पर उनका चलना और शीर्ष नेतृत्व के साथ संतुलन साध कर रहना उनकी खूबी है.

ढुलमुल था फार्मुला

75 की उम्र का फार्मुला जो भाजपा में अभी ततक ढुलमुल माना जा रहा था, उसका असर महाजन के टिकट पर नहीं होगा. इसी भरोसे वे अपनी चुनावी तैयारी करती रहीं. लेकिन जब एक के बाद एक प्रदेश की अधिकतम सीट्स पर उम्मीदवारी तय हो गई और महाजन के नाम की घोषणा नहीं हुई तो उन्हें मजबूरन यह फैसला करना पड़ा.

संघ की दखल नहीं

इस दौरान वे संघ के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में भी रहीं. खास तौर पर सरकार्यवाह भैयाजी जोशी जो संघ में भाजपा का कार्य देखते हैं उनके साथ उनका संवाद बना रहा. लेकिन एक बात जो अंतिम तौर पर उभर कर सामने आई वह यह रही की महाजन के नाम पर कोई विवाद, कोई मुद्दा नहीं है. मामला सिर्फ बीजेपी की पॉलिसी का है. पॉलिसी के मुद्दे पर संघ की कोई दखल नहीं है.

एक गली छूटी हुई

संघ के मिले इस स्पष्ट संकेत के बाद महाजन ने भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल से चर्चा की और अपने चुनावी राजनीति के निर्गम मार्ग ओर प्रस्थान करने की घोषणा कर दी. हालांकि उनके इस पत्र में एक गली छूटी हुई है.

पत्र में उन्होंने लिखा है वे पार्टी संगठन को कोई भी निर्णय लेने के लिए मुक्त करती हैं. उनके समर्थकों का मानना है कि महाजन ने स्वयं को टिकट की लाइन से हटाया है. हाइकमान ने अपनी तरफ से कोई घोषणा नहीं की है
हमारी प्रेरणास्रोत

भाजपा के वरिष्ठ नेता गोविंद मालू कहते हैं कि महाजन का बेदाग लंबा राजनीतिक जीवन रहा है. उन्होंने दुखी मन से पत्र लिखा है और चुनाव की उम्मीदवारी से स्वयं को हटाया है. इससे हमे निराशा हुई है. उन्होंने ऐसा निर्णय क्यों लिया है. यह तो वे ही जानती हैं. वे हमारी प्रेरणास्रोत हमेशा बनीं रहेंगी.
 

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