‘मूमल’ गीत से मशहूर हुए लोक गायक दपु खान नहीं रहे, 25 साल एक ही जगह बैठकर गाया

जोधपुर. राजस्थान के ख्याति प्राप्त लोक गायक दपु खान का शनिवार को निधन हो गया. दपु खान अपने 'मूमल' गायन से मशहूर हुए थे. उन्होंने Coke Studio के लिए भी गाया था. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनके निधन पर शोक जताया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार दपु खान का जोधपुर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां शनिवार को उनका निधन हो गया.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थानी लोक गायकी के इस मशहूर कलाकार के निधन पर शोक जताया है. दपु खान के निधन पर शोक जताते हुए गहलोत ने ट्वीट किया, ‘‘मूमल गीत के लिए विख्यात, लोकवाद्य कमायचा के माहिर दपु खान ने अपने हुनर से प्रदेश के लोक संगीत को देश-विदेश में प्रसिद्धि दिलाई.’’वहीं भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनियां ने भी ट्वीट किया, ‘‘जैसलमेर के ख्यातनाम अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार दपु खान भाड़ली के निधन की खबर पाकर मन दुखी है. शोक संतप्त परिवारजनों एवं उनके सभी प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं.’’ पूनियां के अनुसार जैसलमेर के गड़ीसर तालाब के किनारे बैठकर ’मूमल’ और ’पधारो म्हारे देस’ जैसे अनेक गीत-संगीत सुनाने वाले दपु खान का स्मरण सदैव रहेगा.
प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी ट्वीट करते हुये दपू खां के निधन पर शोक जताया है. ट्विटर पर लिखा है, 'राजस्थान के प्रसिद्ध लोक कलाकार दपू खां भादली जी के निधन का समाचार सुन बहुत दुःख हुआ. पारम्परिक लोक संगीत एवं पुरानी गायकी के धनी दपू खां जी के स्वर्गवास से राजस्थानी लोक संगीत को गहरी क्षति हुई है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति व परिजनों को धैर्य प्रदान करें.'
रानी के महल में बैठते थे दपु खान
दपु खान हर दिन जैसलमेर के किले में रानी के महल में बैठते थे और कमायचा पर पूरे विश्व के पर्यटकों को मूमल सुनाते थे. उन्होंने इस जगह को तब से फिक्स कर लिया था, जब कई साल पहले जिला कलेक्टर ने उनसे प्रसिद्ध कमायचा दिखाने और जैसलमेर किले में प्रवेश करने वाले मेहमानों का स्वागत करने का अनुरोध किया था. वह पिछले 25 सालों से इस जगह पर बैठे थे और यह उनके और उनके परिवार के लिए जीवनयापन का एक हिस्सा प्रदान करता है.
जैसलमेर के रहने वाले थे दपु खान
दपु खान मिरासी पिछले 30 वर्षों से जैसलमेर में रह थे और भादली नाम के एक छोटे से गांव में इनका घर है. दपु ने तब सीखना शुरू किया, जब वह अपने छोटे भाई के साथ एक बच्चे थे. वे अपने पिता के साथ कमायचा लेकर बैठे रहते थे और वहीं से वे वाद्य यंत्र सीखने और खेलने लगे. एक ऐसे कलाकार जो अनपढ़ होकर भी अंग्रेजी भाषा बोला करते थे. उन्होंने राग पहाड़ी, राणा और मल्हार में स्व-संगीतबद्ध गीत प्रस्तुत किए हैं. शुरू में जब उन्होंने अपने घर पर बैठकर गाना शुरू किया तो पूरा मोहल्ला उनके घर के आस-पास इकट्ठा हो गया और उन्हें खेलते हुए सुना, जिससे उन्हें जीवन में एक मकसद मिला और वह थी अपने पूर्वजों की इस महान कला को आगे बढ़ाना.
 

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