राजू पाल हत्याकांड: माफिया अतीक के फरार भाई अशरफ पर इनाम बढ़ाने की तैयारी

प्रयागराज. माफिया अतीक अहमद (Atiq Ahmad) के भाई और पूर्व सपा विधायक अशरफ उर्फ खालिद अजीम (Ashraf) पर प्रयागराज पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. वर्षों से फरार माफिया अशरफ पर इनाम की राशि बढ़ाने की तैयारी कर दी गई है. एडीजी जोन स्तर से अशरफ पर इनामी राशि 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख कर दी गई. इसके बाद अब इसे ढाई लाख रुपए करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है. बता दें बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड में पूर्व विधायक अशरफ आरोपी है और वह 2017 से फरार चल रहा है. इसके अलावा झलवा में सूरज कली और सीमेंट कारोबारी की हत्या के प्रयास में भी पुलिस को अशरफ तलाश है. कोर्ट के आदेश पर अशरफ की संपत्ति की कुर्की चार बार हो चुकी है.

जानकारी के अनुसार पिछले महीने (अगस्त) से इनामी राशि बढ़ाने की कवायद शुरू हुई है. पहले प्रयागराज के SSP ने इनाम की राशि 50 हज़ार से बढ़ाकर ढाई लाख किए जाने के प्रस्ताव अपनी संस्तुति दी. बता दें सीबीआई ने बसपा विधायक राजू पाल की वर्ष 2005 में हुई हत्या के मामले में बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ तथा आठ अन्य अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया है. उच्चतम न्यायालय ने 22 जनवरी 2016 को इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिए थे.

अतीक और उसके भाई अशरफ के अलावा इस मामले में रंजीत पाल, आबिद, फरहान अहमद, इसरार अहमद, जावेद, रफीक, गुल हसन और अब्दुल कवी के खिलाफ आरोप हैं. सीबीआई ने हत्या की साजिश और हत्या के प्रयास के आरोप में आरोपपत्र दाखिल किया है. बसपा विधायक राजू पाल की 25 जनवरी 2005 को इलाहाबाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस वारदात में देवी पाल और संतोष यादव नामक व्यक्तियों की भी मौत हुई थी तथा दो अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे.

2016 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच सौंपने के दिए थे आदेश

राजू पाल की पत्नी पूजा ने इलाहाबाद के धूमनगंज थाने में अतीक और उसके भाई अशरफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस ने इस मामले की जांच में अतीक, अशरफ तथा 9 अन्य लोगों के खिलाफ जांच रिपोर्ट दाखिल की थी. बाद में 12 दिसंबर 2008 को प्रकरण की तफ्तीश सीबीसीआईडी के हवाले कर दी गई. सीबीसीआईडी ने तीन पूरक आरोपपत्र दाखिल किए, लेकिन उनमें से किसी में भी अतीक और अशरफ का नाम शामिल नहीं था. पूजा की याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने 22 जनवरी 2016 को राजू पाल हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए थे.
 

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