रेलवे के पास भुगतान को फंड नहीं

जबलपुर। रेलकर्मियों सावधान, यदि वे या उनके परिवार के सदस्य कितनी भी इमरजेंसी हो तो भी निजी अस्पताल में इलाज कराने नहीं जाएं, क्योंकि रेलवे के जबलपुर मंडल के पास री-एम्बर्स करने के लिए फंड समाप्त हो गया है। आमतौर पर रेलवे के पास इस मद का जो फंड होता है, वह वित्तीय वर्ष मार्च तक रहता है, लेकिन इस बार दिसम्बर माह में ही समाप्त हो चुका है और लगभग दो दर्जन कर्मचारियों की री-एम्बर्स की फाइल अटकी पड़ी है, जिसे वित्त विभाग ने फंड नहीं होने की बात कहकर लौटा दी है।
वैसे तो रेलवे अस्पताल में ही कर्मचारियों का इलाज होता है और जरूरत पड़ने पर रेलवे अस्पताल द्वारा ही निजी अस्पतालों में रेफर करता है, लेकिन कई बार ऐसी आकस्मिक परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है कि रेल कर्मचारी या उनके परिवार के किसी सदस्य के अचानक बीमार पड़ने पर रेलवे अस्पताल तक पहुंचने की स्थिति नहीं बन पाती, जिससे उन्हें अपने समीप के ही किसी निजी अस्पताल में उपचार के लिए जाना पड़ता है। रेलवे में प्रावधान है कि बाद में रेल प्रशासन निजी अस्पताल में लगे उपचार की राशि को री-एम्बर्स कर देता है।
दिसम्बर में ही पंâड खत्म……….
रेल सूत्रों के मुताबिक रेल प्रशासन के पास दिसम्बर माह में ही इस मद के लिए फण्ड समाप्त हो चुका है। जबलपुर मंडल रेल प्रशासन के पास ही लगभग दो दर्जन मामले इस माह पेंडिंग पड़े हैं, जिन्हें वित्त विभाग ने यह कहकर वापस कर दिया है कि अभी फण्ड नहीं है, इसलिए राशि नहीं दी जा सकती।
रेल प्रशासन के इस तर्क से उन कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है, जो आकस्मिक स्थिति में निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती हुए और उनको अपने जेब से काफी मोटी राशि खर्च करना पड़ी है।
