लोकसभा में पेश हुआ मोटर व्हीकल संशोधन बिल, अब वसूला जाएगा अधिक से अधिक जुर्माना

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने लोकसभा मेें मोटर संशोधन बिल पेश कर दिया है। यह बिल पुराने बिल का ही एक नया रूप है। जिसका मकसद दुर्घटना के मूल कारणों को दूर करने के बजाय उल्लंघनकर्ताओं, विशेषकर वाहन चालकों से दंड के नाम पर अधिकाधिक जुर्माना वसूलने पर है। इसमें दुर्घटना के शिकार लोगों से ज्यादा बीमा कंपनियों तथा ट्रांसपोर्टरों की सुविधा का ख्याल रखा गया है।
नया बिल 1988 के पुराने मोटर एक्ट में संशोधन के लिए लाया गया है। इसके लिए पुराने बिल में 88 संशोधन किए गए हैं, जो अपने आप में रिकार्ड है। इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के संयोजक एसपी सिंह का कहना है कि यदि इतने अधिक संशोधन करने थे तो सरकार को संशोधन बिल लाने के बजाय एकदम नया विधेयक लाना चाहिए था। पिछली सरकार ने 2014 में सड़क सुरक्षा एवं प्रबंधन विधेयक के जरिए किया था।
उसमें अमेरिकी आस्ट्रेलियाई मोटर कानूनों के सर्वश्रेष्ठ प्रावधानों जैसे हादसे में मृत्यु पर 20 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति, नियम उल्लंघन करने पर ड्राइवर का लाइसेंस निलंबित और रद करने, ओवरलोडिंग करने वाली या अनफिट गाड़ी को जब्त करने तथा त्रुटिपूर्ण वाहन बनाने वाले निर्माता पर पेनाल्टी लगाने जैसे प्रभावकारी प्रावधान थे। लेकिन इससे स्थिति में कोई विशेष बदलाव आएगा, इसमें संदेह है। तीस वर्षो में ट्रांसपोर्ट सेक्टर के हालात, सड़कें, वाहनों की तकनीक और ड्राइविंग के तौरतरीके एकदम बदल चुके हैं।
ऐसे में संशोधनों के बजाय नए बिल की जरूरत थी।बिल में यातायात उल्लंघन करने वाले चालकों पर पांच-दस गुना अधिक जुर्माना लगाकर दुर्घटनाओं में कमी की कल्पना की गई है। लेकिन, इतिहास गवाह है कि जुर्माने बढ़ाने से हादसों में कमी नहीं होती। इससे पहले केंद्रीय मोटर नियमावली के जरिए जुर्माने की राशि बढ़ाई जा चुकी है। लेकिन, उसका कोई असर नहीं हुआ। वैसे भी सारे जुर्माने चालकों से वसूले जाते हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार को तो बढ़ावा मिलेगा।
मगर हादसे कम होने की कोई गारंटी नहीं।बिल में ड्राइवरों की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता को जो अभी आठवीं पास है, को समाप्त करने का प्रस्ताव किया गया है। तर्क दिया गया है कि मेवात क्षेत्र में अनेक कुशल ड्राइवर हैं, लेकिन अनपढ़ होने के कारण उनका ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनता। इस छूट से उनके डीएल बनेंगे जिससे बेरोजगारी दूर करने में मदद मिलेगी। ऐसे दौर में जब नई तकनीक के वाहनों के साथ सड़क व टोल ढांचे का आधुनिकीकरण हो रहा है, प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के अलावा नियम-कायदे जटिल होते जा रहे हैं, अनपढ़ ड्राइवर इन चुनौतियों का किस तरह मुकाबला करेंगे, यह सोचने का विषय है। वास्तव में तो ड्राइवरों की शैक्षिक योग्यता बढ़ाए जाने तथा उनके वेतन और कार्यदशाओं को सुधारे जाने की जरूरत है। इससे इंटर पास और ग्रेजुएट युवा ड्राइविंग के पेशे में आते। इससे देश में ड्राइविंग का स्तर सुधारने और हादसे कम करने में मदद मिलती। एसपी सिंह के मुताबिक बिल दुर्घटना पीडि़तों को क्षतिपूर्ति के मौजूदा नियमों को कमजोर करता है।
मौजूदा कानून में क्षतिपूर्ति का फैसला एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल करता है जिसमें मृतक और घायल के लिए उसकी आयु, आय, आश्रितों के अनुसार हर्जाने का प्रावधान है जो हजारों से लाखों और करोड़ों रुपये में जा सकता है। परंतु अब तुरंत राहत के नाम पर मृत्यु की स्थिति में क्षतिपूर्ति की राशि को अधिकतम 5 लाख रुपये तथा घायल होने पर ढाई लाख रुपये पर सीमित कर दिया गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे ज्यादातर मामलों में बीमा कंपनियां न्यून राशि देकर बच निकलेंगी। क्योंकि हादसे के बाद पीडि़त की मनस्थिति तत्काल जो मिल रहा है उसे ले लेने की होती है। जब प्रीमियम पर कोई सीमाबंदी नहीं है तो क्षतिपूर्ति पर कैसे हो सकती है।
