विदेशी बाजार में पाम ऑयल, सोयाबीन तेल के दामों में गिरावट से आई नरमी

नई दिल्ली । दुनिया के बाजारों में पाम ऑयल और सोयाबीन तेल में गिरावट के संक्तों के चलते दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को विभिन्न खाद्य तेलों में नरमी देखी गई। सोयाबीन डीगम (कांडला) में प्रति क्विंटल 150 रुपए और पामोलीन आरबीडी और पामोलीन कांडला में 100-100 रुपए क्विंटल की गिरावट दिखी। मूंगफली दाना में 50 रुपए की नरमी दर्ज की गई। जबकि सरसों तेल के दाम पूर्व के स्तर पर बने रहे। अन्य तेल-तिलहनों के भाव भी पहले के स्तर पर बने रहे। मलेशिया में पाम ऑयल का भाव आज 4.5 प्रतिशत नीचे चला गया था। इसी तरह शिकॉगो जिंस बाजार में सोयाबीन तेल के भाव कल 4.25 प्रतिशत तक नीचे चले गए थे और बाजार में नीचे में सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा था। शुक्रवार को भी वहां भाव लगभग एक प्रतिशत नीचे चल रहे थे। सूत्रों ने कहा कि इस समय सरसों का पुराना स्टॉक खत्म है जबकि खपत ज्यादा। ऐसे में सरकार को इसकी रिफाइनिंग पर रोक लगानी चाहिए और नाफेड को सरसों बाजार भाव पर खरीक कर स्टॉक करना चाहिए ताकि समय पर बाजार में हस्तक्षेप कर सके।
बाजार के लोगों ने कहा कि इस समय सरसों तेल अपनी अलग जगह बनाता जा रहा है। वर्तमान में दूसरे खाद्य तेलों के मुकाबले सरसों का भाव अपेक्षाकृत कम है। अन्य तेलों के दाम ऊंचे होने से सरसों तेल का उत्पादन बिना किसी दूसरे तेल का इस्तेमाल करते हुये हो रहा है। सरसों का रिफाइंड भी बनाया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि नए सत्र में सरसों की उपज और स्टॉक की स्थिति को देखते 1980-1990 के दशक की तरह सरसों रिफाइंड के उत्पादन को हतोत्साहित किया जाना चाहिए। तेल उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक देश में इस साल सरसों का 89.5 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया है।
