टाटा समूह पर शीर्ष कोर्ट के फैसले के बाद शपोरजी पालोनजी ग्रुप की मुश्किलें बढ़ी 

नई दिल्ली । देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक टाटा समूह के चर्चित टाटा-मिस्त्री विवाद में देश की सर्वोच्च अदालत ने टाटा ग्रुप के पक्ष में फैसला सुनाया है। इससे शपोरजी पालोनजी ग्रुप की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इससे कर्ज में डूबे एसपी ग्रुप की ऋण पुनर्गठन की योजना कुछ हद तक खटाई में पड़ सकती है। सूत्रों का कहना है कि इससे टाटा संस में एसपी ग्रुप की हिस्सेदारी के मूल्यांकन को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बननी मुश्किल है। एसपी ग्रुप की कोरोना वायरस महामारी को लेकर पेश आरबीआई की स्पेशल स्कीम के तहत 22,000 करोड़ रुपये के अपने ऋण के पुनर्गठन की योजना है। वह अपना कर्ज चुकाने के लिए टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहता है। एसपी ग्रुप की टाटा संस में 18.4 फीसदी हिस्सेदारी है जिसमें से वह आधी हिस्सेदारी 5,074 करोड़ रुपये में एक्सिस बैंक और आईडीबीआई बैंक में गिरवी रख चुका है। बची 9.2 फीसदी हिस्सेदारी की एक हिस्सा भी वह गिरवी रखना चाहता है जिस पर टाटा ने इस पर आपत्ति जताई है। एसपी ग्रुप की टोरंटो की कंपनी ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट से 3750 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद एसपी ग्रुप को अपनी योजना खटाई में पड़ सकती है।
एसपी ग्रुप का कहना है कि टाटा संस में उसकी हिस्सेदारी का मूल्य 1.5 लाख करोड़ रुपये है। दूसरी ओर टाटा संस का कहना है कि एसपी के स्टेक की वैल्यू 70,000 से 80,000 करोड़ रुपये है। सुपीम कोर्ट के फैसले की दोनों पक्ष अपने हिसाब से व्याख्या कर रहे हैं। एसपी ग्रुप का कहना है कि कोर्ट ने टाटा संस की उस याचिका को भी खारिज कर दिया है जिसमें एसपी ग्रुप को कंपनी के शेयर गिरवी रखने से रोकने की मांग की गई थी। दूसरी ओर टाटा संस का कहना है कि कोर्ट ने उसकी इस याचिका को स्वीकार कर लिया है। अगर टाटा संस की बात सही है तो इससे एसपी ग्रुप की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उसे एक्सिस बैंक और आईडीबीआई बैंक में गिरवी रखे गए टाटा संस के शेयर छुड़ाने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही एसपी ग्रुप की उस अंतरिम याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें टाटा संस से ऑनरशिप इंटेरेस्ट्स को अलग करने की मांग की गई थी।
एसपी ग्रुप ने एसपी ग्रुप में अपनी 18.4 फीसदी हिस्सेदारी का टाटा की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों के साथ अदलाबदली का प्रस्ताव दिया था। साइरस मिस्त्री को 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था। तभी से उनकी टाटा परिवार के साथ ठनी हुई है। पिछले साल 29 अक्टूबर को एसपी ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट मं टाटा ग्रुप से अलग होने का एक प्लान जमा किया था। इसमें उसने नॉन-कैश सेटलमेंट की मांग की थी। यानी इस हिस्सेदारी के बदले उन्हैं कैश नहीं बल्कि उन कंपनियों में हिस्सेदारी चाहिए थी जिनमें टाटा संस का स्टेक था।

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