सख्ती का डर…कोरोना के चलते लगातार तीसरे रविवार सड़कों पर पसरा सन्नाटा

भोपाल । राजधानी सहित पूरे प्रदेश में फिर कोरोना भयानक रूप ले रहा है, बता दें कि कई जिलों में रोजाना आने वाले संक्रमण के मामलों का सिलसिला बरकरार है, जिससे हर दिन नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, वहीं कोरोना संकटकाल के बीच बड़े रोकथाम और प्रयासों के बाद भी संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं, इसी बीच आज प्रदेश के कई जिलों में लॉकडाउन लगाया गया है। राजधानी भोपाल आज फिर लॉक हो गई है। कोरोना संक्रमण की चेन तोडऩे के लिए शनिवार रात नौ बजे से लॉकडाउन लागू हो गया, जो सोमवार सुबह छह बजे तक रहेगा। बताते चले कि ऐसे में न तो दुकानें खोलने की इजाजत मिलेगी और न ही बेवजह आने-जाने की वही कई स्थानों पर करीब ढाई हजार पुलिसकर्मी हर वक्त नजर रख रहे हैं। प्रदेश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसके चलते सरकार ने हर रविवार को प्रदेश के कई जिलों में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है, बात दें कि रविवार लॉकडाउन के दौरान केवल जरुरी सेवाएं ही चालू रहेंगी वही कोरोना के संक्रमण का प्रकोप लगातार बढऩे के कारण आज मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल समेत कई जिलों में लॉकडाउन के कारण सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है, बताते चले लगातार तीसरे रविवार को सड़के सुनी रही है। इससे पहले दो बार रविवार को लॉकडाउन लग चुका है।
आइसोलेशन कोचों की फिर शुरू की तैयारी
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए पश्चिम-मध्य रेलवे ने पिछले साल लॉकडाउन के दौरान बनाए 133 आइसोलेशन कोचों की फिर से साफ-सफाई, मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। इन कोचों में 931 बिस्तरों की व्यवस्था है। हालांकि, अभी राज्य सरकार की तरफ से रेलवे से मदद नहीं मांगी गई है, लेकिन रेलवे ने अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। उपलब्ध कोचों में 50 कोच भोपाल मंडल के पास हैं। एक कोच में औसतन सात संक्रमितों को भर्ती करने की व्यवस्था है। इस तरह 133 कोचों में 931 बिस्तर हैं। ये सामान्य बिस्तर हैं। इन्हें ऑक्सीजन बिस्तर में बदलने की व्यवस्था है। मतलब पश्चिम मध्य रेलवे के पास 931 बिस्तरों का चलता-फिरता अस्पताल है, जिसे रेल लाइन वाले शहरों में कहीं भी शिफ्ट किया जा सकता है। फिलहाल इनमें से एक भी बिस्तर का उपयोग नहीं हो रहा है, जबकि प्रदेश के अस्पतालों में आए दिन कोरोना संक्रमित मरीज बिस्तरों की कमी से जूझ रहे हैं।
