साल 2020 मे कोरोना के बीच बढा सायबर क्राईम का ग्राफ

भोपाल। बीते साल 2020 मे जहॉ कोरोना महामारी को लोगो को लेकर दुनिया सहित देशभ्रर मे लोगो का जन-जीवन अस्त व्यस्त रहा। वहीं शातिर सायबर जालसाजो ने कोविड-19 के दौरान भी सायबर क्राईम बढा ओर इसका इस्तेमाल कर शातिरो ने लोगो को अपना शिकार बनाया। एक्सपर्ट ओर सायबर अधिकारियो के अनुसार साइबर ठगो ने जिन हथकंडो का प्रयोग किया उनमें सामान की होम डिलीवरी, सोशल मीडिया पर किसी के नाम की फेक प्रोफाइल बनाकर उसके परिचितो से पैसे अपने एकांउट मे ट्रांर्सफर करवाने जैसै तरीके शामिल रहे। साइबर अफसरो के मुताबिक जालसाजो को नया हथकंडा कोरोना महामारी की वैक्सीन के नाम पर ठगी का है। साइबर ठग इस महामारी की वैक्सीन के नाम पर लोगों को फोन कर कहते हैं कि, “आप वैक्सीन अभी बुक कर लीजिए, यह आपके घर पर ही डिलीवर कर दी जाएगी। अभी यह ऑफर सीमित लोगों के लिए है।” ऐसे लोगो को अपने जाल मे फंसाकर अज्ञात आरोपी वैक्सीन की बुकिंग के नाम पर लोगों को अपना शिकार बनाकर पैसे ऐंठ रहे हैं, जबकि सरकार या किसी कंपनी ने अभी तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। इसके साथ ही साइबर जालसाजो ने बैंक और ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल से मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर भी लोगों को अपना शिकार बनाया है। इस तरह की वारदातो को अंजाम देने के लिये हाईटेक ठगो ने फेसबुक पर पेज बनाया, और वहीं से लोगों को ऑफर भेजते थे। वहीं कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉकडाउन मे जहॉ लाखों लोग अपनी नौकरी खो बैठै। वही सायबर बदमाशो ने लोगो को घर बैठे काम करने के नाम पर मोटी रकम देने का लालच देकर धोखाधड़ी की जो अब भी जारी है। शातिरो ने काम करने नाम पर लोगों से एडवांस रकम ले ली ओर फिर गायब हो गये। अफसरो को कहना है कि ठगो का यह तरीका पहले से ही चलन में है, लेकिन लॉकडाउन के बाद यह काफी बढ़ गया है। हाईटेक जालसाजो ने कोविड-19 को अपना जमकर हथियार बनाया ओर देश भर मे हर तरीके से लोगो से पैसा ऐंठा है। बदमाशो द्वारा लोगों को भरोसा दिलाते हुए उन्हे कोविड मरीज के संपर्क मे आने का झांसा देकर अपने जाल मे फंसाने के लिये सरकारी एजेंसियों के नाम पर ईमेल भेजे जा रहे हैं। इसके बाद आरोपी ऑनलाइन फॉर्म भरवाने के नाम पर लोगो की कई महत्वपूर्ण जानकारियां लेकर अपना कमाल दिखा देते हैं। इसके साथ ही नये और आकर्षक ऐप डाउनलोड के जाल मे फंसकर भी लोग धोखाधडी का शिकार हो जाते है। एक्सर्ट के अनुसार ऐप डाउनलोड करते समय यूजर का एक्सेस ले लिया जाता है। ओर यदि किसी ने लोन लिया और ईएमआई टाईम पर जमा नहीं की हो तो जालसाज उन्हे फोन बुक के जरिये संपर्क कर रकम वसूलने के लिये मैसेज भेजते है, ओर जाल मे फंसे लोगो से अपने एकांउट मे पैसा जमा करवा लेते है। वर्तमान मे ऐसे यूजर सायबर ठगो के सॉफ्ट टारगेट है, जिन्होने एफबी पर अपने मोबाइल नंबर को ही यूजर नेम और उसी को पासवर्ड बना कर रखा है। जालसाज उनकी फ्रेंड लिस्ट में जाकर उनके परिचितो को अपनी परेशानी बताकर पैसे भेजने की रिक्वेस्ट करते हैं। इसके साथ ही हैकर एक और तरीके से भी लोगो को अपना निशाना बना रहे है।
हाईटेक हैकर किसी भी सरकारी अधिकारी के फेसबुक एकाउंट की फेक प्रोफाइल बनाकर लोगो को जाल मे फंसाते हैं। आरोपी किसी अधिकारी के नाम की डिस्प्ले कॉपी करते हैं, और उसका प्रयोग कर फेक आईडी तैयार कर लेते हैं। फिर जिनकी फ्रेंड लिस्ट विजिबल हैं, उनसे नाम लेकर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर उनसे रकम मांगते हैं। आमजन को सायबर ठगो से बचाने के लिये सायबर सेल द्वारा समय-समय पर एडवायजरी जारी कर सोशल मीडीया युजर्स को सावधानिया बरतने की अपील की जाती है। सायबर सेल अधिकारियो ने ऐसे ठगो से बचने के लिये सुझाव दिये है, जिन्हे ध्यान मे रखकर सायबर जालसाजो से बचा जा सकता है।
* एक्सपर्ट्स के अनुसार, फिशिंग ईमेल से सावधान रहें। अगर किसी ईमेल में किसी तरह की जानकारी मांगी जाती है, या फॉर्म भरने को कहा जाता है, तो पहले यह देखें कि ईमेल का सोर्स सही है, या नहीं।
* एंटीवायरस और फायरवाल को अपडेटेड रखें।
* सोशल नेटवर्किंग साइट पर कहीं आने-जाने या घर की लोकेशन का जानकारी अपलोड न करें।
* वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का इस्तेमाल बेहतर है, इससे आईपी एड्रेस छुप जाता है।
* सोशल मीडिया पर फ्रेंड लिस्ट या फोटो गैलरी को सबके लिए ओपन न रखें। इसके अलावा मोबाइल नंबर को यूजर नेम और पासवर्ड नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि इसका अनुमान लगाना बहुत आसान होता है।
