स्कूल के नाम पर 12 बल्लियां, एक शिक्षक और दो छात्र

भोपाल । प्रदेश के एक जिले में ऐसा सरकारी स्कूल है जहां स्कूल के नाम पर बारह बल्लियां है। इस स्कूल में पढाने वाला एक शिक्षक है और पढने वाले दो छात्र है। यह मामला है आलीराजपुर जिले की सोंडवा तहसील के ग्राम पंचायत गुलवट केचे पटेल फलिया खांबा के प्राथमिक विद्यालय का। इस प्राथमिक स्कूल की शिक्षा व्यवस्था प्रदेश सरकार की पोल खोलने के लिए काफी है। विद्यालय में सिर्फ दो बच्चे और एक शिक्षक है। भवन के नाम पर खाली जगह में 12 बल्लियां गड़ी हुई है और छत के नाम पर आसमान खुला हुआ है। हाल ही में शिक्षा विभाग द्वारा नोडल शिक्षक रकनसिंह भयडिया को यहां विशेष ड्यूटी पर 10 दिन के लिए शाला को शुरू करने के लिए भेजा गया है, क्योंकि शिक्षकों के अटैचमेंट खत्म होने के बाद यहां पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं थे। शिक्षक भयडिया यहां आए तो वे भी आश्चर्यचकित रह गए, क्योंकि विद्यालय का भवन तक नहीं है। खुले आसमान के नीचे बच्चे पढ़ने को मजबूर है।
तहसील मुख्यालय से स्कूल करीब 20 किमी दूर है और यह पहाड़ी पर स्थित है। मुख्य सड़क मार्ग से स्कूल की जगह करीब एक किमी दूर है। सर्व शिक्षा अभियान की पोल खोलती इस फोटो से स्पष्ट है कि बीस सालों में एक स्कूल भवन तक नहीं बन सका है। जिम्मेदार अफसरों ने कभी इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। पहले एक झोपड़ी में कक्षा लगती थी, मगर अब वह भी नहीं बची है। जिस दिन पानी गिर जाए तो समझो उस दिन स्कूल की छुट्टी। बताया जा रहा है कि प्राथमिक विद्यालय भवन साल 2005-06 में स्वीकृत हुआ था और निर्माण के लिए पांच लाख रुपए भी मंजूर हुए थे, मगर यह राशि कहां गई इसका पता नहीं है। इस मामले में सहायक आयुक्त मीना मंडलोई का कहना है कि पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी। उसके बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जा सकता है। बहरहाल प्रदेश के सरकारी स्कूल की शिक्षा व्यवस्था का हश्र क्या हो चुका है, यह प्रदेश वासियों से छुपा नहीं है। कहीं स्कूल है तो बच्चे नहीं है, बच्चे है तो शिक्षक नहीं है। शिक्षक भी है तो स्कूल में पढाते नहीं और कई-कई दिनों तक स्कूलों के ताले नहीं खुलते। इन स्कूलों पर निगरानी रखने वालों का ही अतापता नहीं रहता है।
