हाथी पर सवार याकूब कुरैशी ने मेरठ के रण को बनाया दिलचस्प

नई दिल्ली । पश्चिम यूपी की मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट की सियासी लड़ाई काफी दिलचस्प बन गई है। यहां से बीजेपी के राजेंद्र अग्रवाल हैट्रिक लगाने की कोशिश में हैं तो बसपा-सपा-आरएलडी गठबंधन की ओर से बसपा उम्मीदवार हाजी याकूब कुरैशी अपने सियासी वजूद को बचाए रखने के लिए संघर्ष रहे हैं। जबकि कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास के बेटे हरेंद्र अग्रवाल को उतारा है। इसके बाद मेरठ की राजनीतिक लड़ाई त्रिकोणीय बनती नजर आ रही है। मेरठ संसदीय सीट से बसपा उम्मीदवार के तौर चुनावी किस्मत आजमा रहे हाजी याकूब कुरैशी विवादित बयान के लिए भी जाने जाते हैं। याकूब कुरैशी ने 1999 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वे चुनाव हार गए थे। इसके बाद 2002 में याकूब कुरैशी बसपा से विधायक बने और विधायक रहते हुए वह 2003 में सपा में शामिल हो गए। मुलायम सिंह यादव ने उन्हें मंत्री बनाया। मंत्री रहते हुए याकूब कुरैशी ने सपा के दिग्गज नेता आजम खान के खिलाफ बागवत का झंडा उठा लिया, जिसके बाद उन्हें पार्टी से अलग होना पड़ा।
2007में हाजी याकूब कुरैशी यूपीयूडीएफ का गठन करके चुनावी मैदान में उतरे। बसपा लहर में दो सीटों पर चुनाव लड़रहे याकूब कुरैशी एक सीट पर चुनाव जीतने में कामयाब हुए। चुनावी नतीजे आने के चंद दिनों के बाद ही याकूब कुरैशी एक बार फिर बसपा में शामिल हो गए। हालांकि बसपा ने 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बाद आरएलडी के उम्मीदवार के तौर पर कुरैशी सरधना सीट से मैदान में उतरे,लेकिन वहां से जीत नहीं सके हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद याकूब कुरैशी ने बसपा का दामन फिर थाम लिया और 2014 के लोकसभा चुनाव में मुरादाबाद संसदीय सीट से मैदान में उतरे लेकिन इस बार भी वो जीत नहीं सके। 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने उन्हें मेरठ संसदीय सीट से मैदान में उतारा है। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर करीब 18 लाख मतदाता हैं, जिनमें सवा दो लाख वैश्य वोटर हैं। मुस्लिम पांच लाख, साढ़े तीन लाख दलित, ठाकुर 60 हजार, ब्राह्मण डेढ़ लाख, जाट एक लाख, गुर्जर 90 हजार, पंजाबी 50 हजार, पिछड़े और अन्य करीब चार लाख वोटर हैं।
इसबार के लोकसभा चुनाव में मेरठ संसदीय सीट पर याकूब कुरैशी एकलौते मुस्लिम उम्मीदवार हैं, जो दलित, मुस्लिम और जाट मतों के सहारे जीत की उम्मीद लगाए हुए हैं। वहीं, राजेंद्र अग्रवाल वैश्य, ब्राह्मण, त्यागी, ठाकुर और गुर्जर मतों के सहारे हैट्रिक लगाने का सपना देख रहे हैं। इसी तरह से कांग्रेस के हरेंद्र अग्रवाल वैश्य, अति पिछड़ों और मुस्लिमों मतों के सहारे जीत की उम्मीद लगाए हुए हैं।
