33 साल बाद फिर मई में आया बरकतों का महीना रमजान

रायपुर। वर्ष 1986 (1406 हिजरी) में मई के महीने में ही पवित्र माह रमजान आया था। तेज धूप और गर्मी के दौरान चांद का दीदार कर पूरे महीने रोजदारों ने रोजे रखे थे। एक बार फिर मई के महीने में ही वर्ष 2019 (1440 हिजरी) में रमजान का मुबारक महीना मुस्लिम समाज को मिला। खास बात यह है कि चाहे जैसा भी मौसम हो रमजान का समाज के बच्चों, बुजुर्गों के साथ सभी वर्गों के बेसब्री से इंतजार रहता है। इसकी खास वजह यह है कि इस महीने में अल्लाह अपने बंदों की एक नेकी के बदले कई गुना सवाब (पुण्य) देता है।
इस बार भी कौम ने पहले से मिजाज बनाकर रखा है कि चाहे मौसम की जीतनी तल्खी हो, हम उतने ही शिद्दत से रोजे रखकर अपने रब को राजी करेंगे। वहीं बुजुर्गों ने बताया कि उस दौर में उतनी सुविधाएं नहीं थी, जितनी इस दौर में है, लेकिन रमजान को लेकर उतनी ही आज भी है, जितनी उस दौर में हुआ करती थी।
रमजान को लेकर सज गए बाजार
वहीं पूरी दुनिया समेत राजधानी रायपुर में भी रमजान के लिए जरूरी तैयारियां लगभग पूर्ण कर ली गई हैं। शहर में रमजान को लेकर बाजार सज गए हैं। मस्जिदों में भी जिम्मेदारों ने साफ-सफाई से लेकर अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं। लाइटों से मस्जिदों को सजाया जा रहा है।
सोमवार को होगी पहली तरावीह
रविवार को रात आठ बजे तक चांद नहीं दिखने तस्दीक नहीं हुई और न ही कोई खबर मिली। इसलिए काजी ए शहर मौलाना मोहम्मद अली फारूखी सा. बैजनाथपारा ने ऐलान किया कि सोमवार को पहली तरावीह की नमाज अदा की जाएगी। और पहली सेहरी कर समाज के लोग रमजान का पहला रोजा रखेंगे।
आधा ईमान है पवित्रता
ये पाक (पवित्रता) महीना है, हमें अपने दिल, दिमाग और शरीर को भी पवित्र रखना चाहिए। आज स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन 1400 वर्ष पूर्व रसूले पाक पैगम्बर मोहम्मद सल्लाहो अलैह वस्सलम ने सबसे पहले फरमाया था अरबी में, जिसका मतलब ये है कि पवित्रता आधा ईमान है। स्वच्छता का अभियान सबसे पहले चलाया था। आज भी इस मुहिम में कार्य हो रहे हैं, लेकिन उस दौर के मुताबिक नहीं इसलिए मुस्लिम समाज के साथ सभी वर्गों को भी साफ-सफाई का ध्यान रखकर अपने इलाके, गली, मोहल्ले को साफ सुथरा रखा जाए। – मौलाना मोहम्मद अली फारूखी, शहर-ए-काजी
