ग्रामीणों ने सरकारी गेहूं लेने से किया इनकार, कहा- इसे खाकर हमें नहीं मरना

हरियाणा में सोनीपत जिले के गांव जठेडी में गरीबों के साथ बड़ा मजाक किया गया है. गरीबों में बांटा जाने वाला गेहूं जो हर महीने डिपो पहुंचता है वो लेने कि लिए इस बार जब लोग पहुंचे तो कट्टा खोलने पर उसमें से सड़े हुए गेहूं निकले. इस पर ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया. ग्रामीणों का कहना है कि इस अनाज को खाकर मरना नहीं है. ग्रामीणों ने कहा कि इस गेहूं को तो जानवर भी नहीं खाएंगे. वहीं डिपो होल्डर नवीन ने कहा कि गेहूं भीगा हुआ था. इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की थी. बावजूद इसके ये गेहूं गरीबों में बांटने के आदेश दे दिए गए. हालांकि ग्रामीणों के विरोध के बाद गेहूं बांटना बंद कर दिया गया.
सरकार से जांच की मांग
सोनीपत के गांव जठेडी के डिपो में भेजा गया गेहूं पूरी तरह सड़ चुका है. वहीं ग्रामीणों का कहना है कि इससे अच्छा होता कि संबंधित अधिकारी इसे भेजते ही नहीं. अब ग्रामीणों ने सरकार से जांच की मांग की है.
डिपो होल्डर ने भी मानी अधिकारियों की गलती
वहीं डिपो होल्डर नवीन ने बताया कि गेहूं के भीगने और खराब होने की शिकायत उच्च अधिकारियों को भेजी थी, लेकिन किसी ने सुनी नहीं और इसे ही बांटने के आदेश दे दिए गए. डिपो होल्डर ने खुद भी माना है कि गेहूं पूरी तरह खराब हो चुका है.
बहरहाल, ये कोई पहला मामला नहीं है जब गेहूं सड़ चुका हो. इससे पहले भी कष्ट निवारण समिति में सड़े हुए गेहूं का मामला उठ चुका है. खैर इस मामले में अधिकारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में अब देखना होगा कि इस मामले में ठोस कार्रवाई होती है या नहीं, अगर होगी तो कब तक.
