अपराध पर लगाम के लिए बड़ा कदम, मुंबई लोकल स्टेशनों पर AI निगरानी

मुंबई। आर्थिक राजधानी की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों में पिछले कुछ समय से आपराधिक वारदातों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। पिछले महज छह महीनों के भीतर चलती ट्रेनों में दो यात्रियों की बेरहमी से हत्या किए जाने के बाद अब महाराष्ट्र सरकार और पुलिस महकमा पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। इन गंभीर घटनाओं को देखते हुए महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सदानंद दाते ने मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क के अंतर्गत आने वाले 150 रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था का तत्काल प्रभाव से कड़ा ऑडिट कराने का फैसला किया है।
सुरक्षा को लेकर हुई हाई-लेवल बैठक और कड़े निर्देश
लगातार होती वारदातों के बाद पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अधिकारियों को कड़े लहजे में हिदायत दी गई कि यात्रियों की जानमाल की सुरक्षा के साथ किसी भी सूरत में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक के दौरान हाल ही में चर्चगेट-नालासोपारा लोकल ट्रेन के भीतर हुई खौफनाक वारदात पर भी गहन चर्चा की गई, जहां बोगी का दरवाजा बंद करने जैसी मामूली बात पर भड़के विवाद में एक बेगुनाह यात्री को मौत के घाट उतार दिया गया था। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से ही ट्रेनों में आम जनता के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए नए सिरे से योजना तैयार की जा रही है।
डेढ़ सौ स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था का होगा कायाकल्प
सुरक्षा के नए ब्लूप्रिंट के तहत मुंबई के पश्चिम रेलवे के 42 और मध्य रेलवे के 108 स्टेशनों की कमियों को बारीकी से परखा जाएगा। इस व्यापक ऑडिट का मुख्य मकसद स्टेशनों पर मौजूद सुरक्षा खामियों को उजागर कर उन्हें तुरंत ठीक करना है। पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि अब हर स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ और संवेदनशीलता के अनुपात में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही स्टेशनों के मुख्य एंट्री और एग्जिट गेट पर चेकिंग को बेहद आधुनिक और सख्त बनाया जा रहा है, ताकि कोई भी संदिग्ध व्यक्ति अंदर न आ सके। महिला डिब्बों की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान देते हुए वहां लगाए जा रहे पैनिक बटनों को भी जल्द से जल्द चालू करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाई-टेक कैमरों और तकनीकों से लैस होगा रेलवे नेटवर्क
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अब पारंपरिक सुरक्षा के बजाय आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। स्टेशनों पर लगे पुराने और सामान्य सीसीटीवी कैमरों की जगह अब चेहरे की पहचान करने वाले यानी 'फेशियल रिकग्निशन' सॉफ्टवेयर से लैस अत्याधुनिक कैमरे इंस्टॉल किए जाएंगे। इसके अलावा रेलवे पुलिस उन सभी अनधिकृत रास्तों को भी हमेशा के लिए सील करने की तैयारी में है, जिनके जरिए असामाजिक तत्व बिना किसी डर के स्टेशन परिसर में दाखिल हो जाते थे। इन सभी संवेदनशील और अवैध प्रवेश द्वारों पर अब चौबीसों घंटे सुरक्षाकर्मियों का पहरा रहेगा।
समय से पहले बैठक बुलाकर उठाए गए सख्त कदम
नियमों के मुताबिक रेल यात्रियों की सुरक्षा की समीक्षा केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर हर तीन महीने में की जाती है। इस कड़ी में पिछली बैठक बीते अप्रैल महीने में आयोजित की गई थी और अगली बैठक के लिए अभी वक्त बाकी था। लेकिन मुंबई लोकल में सफर करने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पैदा हुए गंभीर हालात और हालिया हत्याओं की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक ने समय से पहले ही यह विशेष आपातकालीन बैठक बुलाकर कड़े सुरक्षा उपाय लागू करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
