मोदी की रणनीति नहीं आई काम, CJP के रुख के बाद धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

नई दिल्ली। देशव्यापी छात्र आक्रोश और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उनके इस्तीफे से पहले सरकार ने इस बड़े विवाद को सुलझाने का एक आखिरी प्रयास किया था, लेकिन आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों पर अडिग रहे।
मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव खारिज
गतिरोध समाप्त करने के लिए सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से स्थानांतरित कर किसी अन्य विभाग का प्रभार सौंपने का विकल्प पेश किया था। इस बातचीत का जिम्मा भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने संभाला था। हालांकि, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र संगठन ने इस पेशकश को सीधे सिरे से ठुकरा दिया और स्पष्ट किया कि केवल विभाग बदलने से जवाबदेही तय नहीं होगी।
राहत के बाद भी नहीं माना संगठन
सूत्रों के अनुसार, सरकार छात्रों की दो प्रमुख शर्तों पर पहले ही सहमत हो चुकी थी। प्रदर्शनकारियों पर दर्ज पुलिस मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी और परीक्षा में गड़बड़ी के कारण जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को मुआवजा देने की तैयारी थी। सरकार को उम्मीद थी कि इन राहतों के बाद छात्र मान जाएंगे, लेकिन संगठन पूर्व शिक्षा मंत्री के पूर्ण इस्तीफे की शर्त पर अड़ा रहा।
36 दिनों से चल रहा धरना समाप्त
देशभर में फैलते जनाक्रोश और वार्ता विफल होने के बाद आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से हटना पड़ा। उनके पद छोड़ते ही राजधानी में पिछले 36 दिनों से जारी छात्रों का विरोध-प्रदर्शन भी समाप्त घोषित कर दिया गया। हालाँकि इस पूरे मामले पर शासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
