चिटफंड घोटाले के नामजद अभियुक्त बासुदेव बागची सहरसा जेल भेजे गए

सहरसा,। सहरसा सदर थाना कांड संख्या 207/15 के नामजद अभियुक्त और प्रयाग इन्फोटेक हाई-राइज लिमिटेड के चेयरमैन बासुदेव बागची को कोलकाता पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट पर सहरसा कोर्ट में पेश किया। न्यायालय में पेशी के बाद उन्हें सहरसा मंडल कारा भेज दिया गया। बागची के खिलाफ सहरसा सदर थाना में वर्ष 2015 में चिटफंड के नाम पर राशि की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। मामले के अनुसार, पटुआहा निवासी विकास चंद्र मिश्रा और उनकी पत्नी राखी मिश्रा ने आरोप लगाया था कि प्रयाग समूह की योजनाओं में निवेश के नाम पर उनसे करीब 7 लाख 56 हजार रुपये लिए गए। निवेश की गई राशि वापस नहीं मिलने के बाद दंपती ने सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी मामले में बासुदेव बागची को नामजद अभियुक्त बनाया गया था। बासुदेव बागची को अदालत में पेश कराने के लिए पुलिस की ओर से रिमांड वारंट जारी करने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद कोलकाता पुलिस उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर सहरसा लेकर पहुंची और न्यायालय में पेश किया। बताया जाता है कि प्रयाग इन्फोटेक हाई-राइज लिमिटेड (प्रयाग ग्रुप) के चेयरमैन बासुदेव बागची और उनके बेटे पर बड़े पैमाने पर चिटफंड घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, समूह पर हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि प्रयाग समूह ने कथित तौर पर बिना वैध अनुमति के विभिन्न पोंजी योजनाएं संचालित कीं। मासिक आय योजना, रिडीमेबल प्रिफरेंस शेयर और क्लब मेंबरशिप जैसी योजनाओं के जरिए निवेशकों को आकर्षक रिटर्न का भरोसा दिलाकर राशि जमा कराई गई। बाद में कई निवेशकों को उनकी जमा राशि वापस नहीं मिलने की शिकायत सामने आई। इस मामले में वर्ष 2017 में सीबीआई ने बासुदेव बागची को गिरफ्तार किया था। जमानत पर रिहाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में जांच आगे बढ़ाई। नवंबर 2024 में ईडी ने कोलकाता और मुंबई में विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की थी और बागची को गिरफ्तार किया था। सहरसा में दर्ज मामले में अब बासुदेव बागची की न्यायालय में पेशी के बाद उन्हें सहरसा मंडल कारा भेजे जाने से चिटफंड मामले की कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ने की उम्मीद है।

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