अपनी ही सरकार के सिस्टम पर भडक़े भाजपा विधायक, बोले-खनिज अधिकारी ही करवा रहे हैं ‘चोरपना’

गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले में अपने बेबाक और कड़े बयानों के लिए हमेशा राजनीतिक चर्चाओं में रहने वाले भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गुरुवार को शहर के एक निजी होटल में आयोजित 'तेजस कार्यशाला' के मंच से विधायक शाक्य ने खनिज विभाग में चल रहे कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का कच्चा चिट्ठा जनता और अधिकारियों के सामने खोलकर रख दिया। उन्होंने अपने ठेठ और तीखे अंदाज में खनिज विभाग के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विभाग द्वारा जुर्माने के नाम पर आम जनता को डराया जा रहा है और अपनी जेबें भरने का खुला खेल चल रहा है।
तेजस कार्यशाला में उमड़े उद्यमी और युवा, प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गरमाई सियासत
यह पूरा मामला गुना में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने और युवाओं को नवाचार से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित कार्यशाला का है, जिसे जिला प्रशासन, उद्योग विभाग और केंद्र सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में शहर के तमाम बड़े उद्योगपति, व्यापारी और युवा उद्यमी शामिल हुए थे। हालांकि, कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए प्रेरित करना था, लेकिन मंच पर आते ही विधायक पन्नालाल शाक्य का पूरा ध्यान प्रशासनिक मनमानी और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर केंद्रित हो गया, जिससे पूरे सभाकक्ष में सन्नाटा पसर गया और सियासी गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई।
किसान की ट्रैक्टर ट्रॉली पर जुर्माने का किस्सा सुनाया, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल
विधायक शाक्य ने अपनी विधानसभा क्षेत्र के एक गरीब किसान के साथ घटी घटना का विस्तार से जिक्र करते हुए बताया कि एक मतदाता किसान अपनी ट्रॉली में अनाज बेचने के बाद घर के छोटे-मोटे निर्माण कार्य के लिए एक फड से बाकायदा पैसे देकर रेत (भसुआ) खरीदकर ला रहा था, जो उसने किसी अवैध स्थान से नहीं बल्कि वैध तरीके से खरीदी थी। इसके बावजूद रास्ते में खनिज विभाग के अधिकारियों ने उसकी ट्रॉली को पकड़कर भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया। विधायक ने जब इस संबंध में खनिज अधिकारी को फोन किया, तो अधिकारी ने उनकी बात अनसुनी कर दी और रटा-रटाया जवाब देते हुए कहा कि इस पर तो जुर्माना ही होगा।
एसडीएम और कलेक्टर की कार्यप्रणाली से भी रहे नाराज, राजनीतिक गलियारों में मची खलबली
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक ने जब क्षेत्र की एसडीएम को फोन कर पूरी स्थिति से अवगत कराया, तो एसडीएम ने भी अपनी लाचारी जताते हुए अधिकारी द्वारा रसीद काटे जाने की बात कही, जिस पर विधायक का गुस्सा और अधिक भड़क उठा। इसके बाद जब उन्होंने जिला कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से संपर्क साधना चाहा, तो फोन व्यस्त होने के कारण तुरंत कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। इस पूरी घटना के दौरान कार्यशाला में विधायक और कलेक्टर के बीच की दूरी और आपसी तल्खी साफ तौर पर देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रनिधियों के बीच समन्वय का अभाव जिले की सियासत में एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
