लव जिहाद मामले में गरजा बुलडोजर, खरगोन में करोड़ों नहीं, 50 लाख का अवैध एस्ट्रो टर्फ ध्वस्त

खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के सनावद क्षेत्र में शुक्रवार को स्थानीय प्रशासन ने एक बड़े और अवैध निर्माण पर बुलडोजर की कार्रवाई करते हुए उसे पूरी तरह जमींदोज कर दिया। चांदनीपुरा इलाके में बने एस्ट्रो टर्फ को हटाने के लिए करीब तीन घंटे तक चला यह विध्वंस अभियान भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया गया ताकि कानून-व्यवस्था की कोई स्थिति उत्पन्न न हो। यह कठोर प्रशासनिक कार्रवाई हाल ही में सामने आए एक चर्चित मामले के बाद बढ़ते जन-आक्रोश और प्रशासनिक जांच के परिणामस्वरूप की गई है।
क्यों की गई अवैध निर्माण पर यह बड़ी कार्रवाई?
स्थानीय प्रशासन से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस संबंधित निर्माण कार्य के लिए किसी भी प्रकार की वैध अनुमति या मंजूरी नहीं ली गई थी।
संयुक्त कार्रवाई: इसी गंभीर अनीति और अवैधता के आधार पर पुलिस, राजस्व विभाग और नगर पालिका की संयुक्त टीमों ने समन्वय बनाकर यह कार्रवाई अंजाम दी।
मशीनरी का इस्तेमाल: मौके पर एक साथ सात जेसीबी मशीनों को लगाया गया और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर कड़ी निगरानी रखी गई।
प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अवैध निर्माणों के खिलाफ हमेशा कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की जाती है और इसमें सभी तय प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन किया जाता है।
जांच में सामने आई अनुमति की कमी और विरोध प्रदर्शन
सनावद क्षेत्र में घटी एक आपराधिक घटना के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया था।
संगठनों का कहना था कि आरोपी से जुड़े तमाम अवैध निर्माणों की भी गहन जांच होनी चाहिए।
इस मांग को लेकर एक बड़ी रैली भी निकाली गई थी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा गया था, जिसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी थी।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि संबंधित एस्ट्रो टर्फ के निर्माण के लिए कोई वैधानिक मंजूरी नहीं ली गई थी और यह पूरी तरह नियमों के विरुद्ध था। इसके बाद शुक्रवार की सुबह प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा और लगभग तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद अवैध ढांचे को नेस्तनाबूद कर दिया गया।
पुलिस की गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया
उल्लेखनीय है कि पुलिस ने इस मुख्य मामले में आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। हालांकि, आरोपी के खिलाफ दर्ज अन्य आपराधिक मामलों की सुनवाई अदालत में तय न्यायिक प्रक्रिया के तहत लगातार जारी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आपराधिक कृत्य और अवैध निर्माण से जुड़ी कार्रवाई दो अलग-अलग स्वतंत्र कानूनी प्रक्रियाएं होती हैं। यदि कोई ढांचा स्थानीय शहरी या ग्रामीण नियमों का उल्लंघन करता है, तो सक्षम विभाग जांच के उपरांत उसे ध्वस्त करने का अधिकार रखते हैं, जबकि किसी व्यक्ति पर लगे अपराधों का फैसला केवल अदालत साक्ष्यों के आधार पर करती है।
फिलहाल खरगोन जिला प्रशासन ने दोटूक शब्दों में कहा है कि जिले में नियमों को ताक पर रखकर किए गए अवैध निर्माणों के खिलाफ यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। साथ ही प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
