कलेक्टर ने दमोह मंडी में दिखाई सख्ती, किसानों की समस्याएं सुनी

दमोह: मध्य प्रदेश के दमोह जिले से कृषि उपज मंडी की बदहाली को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। दो-दो राज्यमंत्रियों के गृह जिले की इस प्रमुख मंडी में चल रही अव्यवस्थाओं ने शासन-प्रशासन के तमाम दावों की हकीकत उजागर कर दी है। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर एक औचक कार्रवाई की गई है, जिसके चलते मंडी प्रशासन में हड़कंप मच गया।
कलेक्टर के औचक निरीक्षण में खुली पोल
जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी (कलेक्टर) द्वारा सोमवार को अचानक जिला कृषि उपज मंडी का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान वहां का जमीनी सच देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। दूर-दराज से अपनी फसल बेचने आए अन्नदाताओं के लिए मंडी परिसर में कोई बुनियादी इंतजाम नहीं थे। किसानों को न तो शुद्ध पेयजल मिल रहा था, न आराम करने की जगह थी और न ही सुचारू शौचालय की सुविधा उपलब्ध थी।
तुलाई के नाम पर अवैध वसूली और किसानों का दर्द
जांच के दौरान अधिकारियों ने सीधे मंडी में मौजूद किसानों से संवाद कर उनकी बुनियादी तकलीफों को समझा।
अवैध वसूली: किसानों ने शिकायत की कि मंडी में उनसे अनाज की तुलाई के नाम पर ₹22 प्रति क्विंटल तक की अवैध वसूली की जा रही है।
भीषण गर्मी में परेशानी: किसानों ने बताया कि वे 25 से 30 किलोमीटर का सफर तय करके अपनी उपज बेचने आते हैं, लेकिन इस भीषण उमस और धूप में उनके लिए छांव तक की व्यवस्था नहीं है।
दोषियों को सख्त चेतावनी और त्वरित कार्रवाई
अवैध वसूली और बदहाली की पुष्टि होने पर कलेक्टर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने पूरे मामले की गहन जांच के आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि अवैध वसूली में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।
प्रशासनिक सख्ती का असर यह हुआ कि निरीक्षण के महज दो घंटे के भीतर ही मंडी में बदलाव दिखने शुरू हो गए। किसानों के लिए ₹5 वाली रियायती थाली की भोजन व्यवस्था तत्काल प्रभाव से बहाल की गई और पानी के टैंकर लगवाए गए। इसके साथ ही पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब अनाज खरीदने वाले व्यापारियों के मोबाइल नंबर और पते मंडी में लगे टीवी डिस्प्ले पर सार्वजनिक किए जाएंगे।
