कट्टरपंथी सामग्री पर शिकंजा, महाराष्ट्र में 114 प्रकाशनों के खिलाफ कार्रवाई

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा के बढ़ते प्रसार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य के गृह विभाग ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा के तहत एक कड़ा आदेश जारी करते हुए विभिन्न प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों, पत्रिकाओं, पुस्तकों और डिजिटल प्रचार सामग्रियों को सरकार के पक्ष में जब्त करने की घोषणा की है।

एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) की खुफिया रिपोर्ट और साइबर सर्विलांस के आधार पर हुई कार्रवाई, हिंसक उग्रवाद का हो रहा था महिमामंडन

राज्य एटीएस की व्यापक खुफिया रिपोर्ट और डिजिटल सर्विलांस के जरिए यह खुलासा हुआ था कि कई प्रतिबंधित और कुख्यात आतंकवादी संगठनों द्वारा सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड चैनलों और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए युवाओं को भड़काने वाली सामग्री प्रसारित की जा रही थी। इन प्रकाशनों में हिंसक उग्रवाद और जिहाद का खुलेआम महिमामंडन किया जा रहा था, जिससे देश की संप्रभुता और अखंडता को गंभीर खतरा पैदा हो रहा था।

ISIS और अल-कायदा जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ी सामग्रियां शामिल, युवाओं को आतंकी गतिविधियों में जोड़ने का चल रहा था षड्यंत्र

सरकार द्वारा प्रतिबंधित की गई सूची में मुख्य रूप से 'वॉयस ऑफ खुरासान' जैसी पत्रिकाओं के विभिन्न अंक शामिल हैं, जिनका सीधा संबंध इस्लामिक स्टेट (ISIS), आईएसकेपी, हिज्ब-उल-मुजाहिदीन और अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट जैसे खूंखार आतंकी संगठनों से है। जांच में सामने आया कि इस सामग्री का इस्तेमाल नई पीढ़ी को कट्टरपंथ की तरफ मोड़ने और आतंकवादी संगठनों में उनकी भर्ती कराने के लिए किया जा रहा था।

सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबंध अनिवार्य, सामग्री के संग्रहण और प्रसारण पर रहेगी पूर्ण रोक

महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन सभी आपत्तिजनक दस्तावेजों, पुस्तकों, चित्रों और डिजिटल प्रतियों का प्रकाशन, वितरण, बिक्री, संग्रहण या किसी भी रूप में ऑनलाइन प्रसारण सार्वजनिक सुरक्षा और शांति के लिए बड़ा खतरा है। प्रशासन का यह सख्त कदम राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को राष्ट्रविरोधी ताकतों के कुप्रभाव से सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम पहल है।

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