अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के दर्शन, दिल्ली के इन मंदिरों में जा सकते हैं श्रद्धालु

अनंत चतुर्दशी सनातन धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पावन अवसर पर भगवान श्री हरि विष्णु के अनंत स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धालु व्रत धारण करते हैं, भगवान विष्णु को फल, पुष्प एवं नैवेद्य अर्पित करते हैं तथा पूजन के उपरांत 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांह पर धारण करते हैं। धार्मिक परंपरा में इन 14 गांठों को चौदह लोकों का प्रतीक माना जाता है।

वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी का यह पावन पर्व 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। दिल्ली एवं आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले श्रद्धालु इस अवसर पर गृह-पूजन के साथ-साथ प्रसिद्ध देवालयों में जाकर भगवान के दर्शन एवं महाआरती में सम्मिलित हो सकते हैं। राष्ट्रीय राजधानी में भगवान विष्णु तथा उनके विविध स्वरूपों को समर्पित कई ऐतिहासिक एवं सिद्ध मंदिर स्थित हैं। लक्ष्मी नारायण मंदिर (बिरला मंदिर) भगवान नारायण की उपासना हेतु विशेष केंद्र है, वहीं इस्कॉन दिल्ली में भी इस तिथि को अनंत चतुर्दशी व्रत का विशेष आयोजन पंजीकृत है।

यदि आप इस पावन अवसर पर दिल्ली में मंदिर दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो इन प्रमुख स्थलों को अपनी सूची में सम्मिलित कर सकते हैं।

अनंत चतुर्दशी पर देवालय दर्शन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश

  • अनंत सूत्र: पूजन हेतु 14 गांठों वाला अनंत सूत्र अपने साथ ले जा सकते हैं।

  • पूजन सामग्री: भगवान विष्णु को फल, पुष्प, तुलसी दल एवं नैवेद्य अर्पित करने की प्राचीन परंपरा है।

  • पारंपरिक विधि: व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी कुलाचार अथवा पारंपरिक पूजन-पद्धति का पालन करें।

  • समय का चयन: मंदिरों में श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को दृष्टिगत रखते हुए प्रातः अथवा सायं का समय चुनें।

  • यातायात स्थिति: इसी दिन गणेश विसर्जन का पर्व भी होने के कारण दिल्ली के अनेक मार्गों पर भीड़ एवं यातायात डायवर्जन हो सकता है।

  • आरती एवं पूजन समय: किसी विशिष्ट मंदिर की विशेष आरती अथवा अनंत पूजन में सहभागिता हेतु प्रस्थान से पूर्व मंदिर की आधिकारिक समय-सारणी अवश्य जांच लें।

लक्ष्मी नारायण मंदिर (बिरला मंदिर)

अनंत चतुर्दशी के अवसर पर भगवान विष्णु के दर्शन एवं पूजन हेतु दिल्ली का प्रसिद्ध लक्ष्मी नारायण मंदिर एक अत्यंत उत्तम स्थल है। इसे सामान्यतः बिरला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह देवालय मुख्य रूप से भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी को समर्पित है।

इस भव्य मंदिर का निर्माण वर्ष 1933 से 1939 के मध्य हुआ था और इसका औपचारिक उद्घाटन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा किया गया था। मंदिर की आधिकारिक सूचना के अनुसार, यहां सोमवार से शनिवार प्रातः 4:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक तथा तत्पश्चात दोपहर 2:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक दर्शन किए जा सकते हैं। रविवार को मंदिर प्रातः 4:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक निरंतर खुला रहता है।

इस्कॉन मंदिर, ईस्ट ऑफ कैलाश

अनंत चतुर्दशी के पर्व पर दिल्ली का इस्कॉन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र रहता है। ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित हरे कृष्णा हिल्स पर निर्मित यह मंदिर श्री श्री राधा पार्थसारथी को समर्पित है।

इस पावन तिथि पर मंदिर में भगवान अनंतदेव की विशेष आराधना की जाती है और श्रद्धालु नियमपूर्वक व्रत रखते हैं। भगवान श्री कृष्ण की भक्ति, हरिनाम संकीर्तन एवं प्रामाणिक वैष्णव परंपरा के मध्य इस पर्व का अलौकिक वातावरण श्रद्धालुओं को अनुपम शांति प्रदान करता है। सामान्य दिनों में यह देवालय प्रतिदिन प्रातः 4:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक दर्शनार्थ खुला रहता है।

स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर

दिल्ली के स्थापत्य कला के अद्भुत प्रतीक अक्षरधाम मंदिर को भी इस धार्मिक यात्रा का अंग बनाया जा सकता है। मंदिर के मुख्य परिसर में भगवान स्वामीनारायण के साथ-साथ सीता-राम, राधा-कृष्ण, लक्ष्मी-नारायण एवं शिव-पार्वती के अत्यंत भव्य शिखर देवालय स्थित हैं।

आधिकारिक विवरण के अनुसार, मंदिर में दर्शन का समय प्रातः 10:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक रहता है, जबकि दैनिक आरती प्रातः 10:30 बजे एवं सायं 6:00 बजे संपन्न होती है। यह परिसर मंगलवार से रविवार तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है, जबकि प्रत्येक सोमवार को साप्ताहिक रखरखाव हेतु बंद रहता है।

इस्कॉन दिल्ली के वैष्णव वातावरण में अनंत पर्व

यदि आपकी मंशा केवल सामान्य दर्शन की न होकर पूर्णतः वैष्णव मर्यादा के अनुसार अनंत चतुर्दशी के आध्यात्मिक वातावरण को अनुभूत करने की है, तो इस्कॉन दिल्ली एक सर्वोत्तम केंद्र है। संस्थान ने अपने वर्ष 2026 के अधिकृत वार्षिक कैलेंडर में 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी व्रत के रूप में स्पष्ट रूप से अंकित किया है।

यहां श्रद्धालुओं को निरंतर नामावली जप, दिव्य संकीर्तन एवं हरि-कथा के मध्य पर्व मनाने का अवसर प्राप्त होता है।

स्थानीय एवं प्राचीन लक्ष्मी-नारायण मंदिर भी हैं उत्तम विकल्प

अनंत चतुर्दशी पर पूजन-अर्चन हेतु यह आवश्यक नहीं है कि केवल बड़े एवं प्रसिद्ध मंदिर परिसरों में ही जाया जाए। भगवान श्री हरि के अनंत स्वरूप की पूजा अपने गृह-मंदिर अथवा निकटतम विष्णु एवं लक्ष्मी-नारायण मंदिर में भी पूरी श्रद्धा के साथ की जा सकती है। पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक क्षेत्रों में भी लक्ष्मी-नारायण के अनेक पारंपरिक एवं सिद्ध मंदिर विद्यमान हैं, जैसे कुचा पातीराम स्थित प्राचीन मंदिर।

अतः यदि प्रमुख मंदिरों में जनसैलाब अधिक हो, तो अपने निवास के समीप स्थित किसी शांत एवं प्राचीन विष्णु मंदिर में जाकर भी भावपूर्ण पूजन संपन्न किया जा सकता है।

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