भटूरे नहीं फूलते? आटा गूंथते वक्त करें ये छोटा सा काम, मिलेगा परफेक्ट रिजल्ट

रेस्तरां या हलवाई की दुकान पर मिलने वाले फूले-फूले और बेहद मुलायम भटूरे देखकर अक्सर घरों में खाना बनाने वालों के मन में यह सवाल आता है कि उनके हाथ से वैसे भटूरे क्यों नहीं बन पाते। कई बार पूरी मेहनत के बाद भी भटूरे या तो सख्त हो जाते हैं या फिर कढ़ाई में जाते ही पिचक जाते हैं। रसोई विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समस्या की मुख्य वजह मैदा गूंथने के दौरान की जाने वाली छोटी-मोटी कमियां हो सकती हैं। अगर सामग्री का अनुपात और कुछ खास ट्रिक्स का ध्यान रखा जाए, तो घर पर भी आसानी से बिल्कुल बाजार जैसे स्पंजी और गुब्बारे की तरह फूले हुए भटूरे तैयार किए जा सकते हैं।

भटूरों को एकदम सॉफ्ट बनाने के लिए केवल सादे पानी से मैदा गूंथना काफी नहीं होता। आटा तैयार करते समय उसमें फ्रेश दही और हल्के गुनगुने दूध का इस्तेमाल करना सबसे बेहतरीन तरीका माना जाता है। दही और दूध का यह संयोजन मैदे के टेक्सचर को लचीला और नरम बनाता है, जिससे भटूरे तलने के बाद अंदर से जालीदार व मुलायम और बाहर से एकदम परफेक्ट बनते हैं। अधिकतर ढाबों और होटलों में इसी सीक्रेट फार्मूले का उपयोग किया जाता है।

बेकिंग सोडा और चीनी का सही संतुलन

भटूरों को अच्छी तरह फुलाने में रासायनिक संतुलन का बड़ा हाथ होता है। मैदा गूंथते समय उसमें चुटकी भर बेकिंग सोडा मिलाना अनिवार्य है, क्योंकि यह भटूरों को अंदर से स्पंजी बनाने का काम करता है। हालांकि, इसकी मात्रा पर नियंत्रण रखना जरूरी है, क्योंकि अत्यधिक सोडा भटूरों को तैलीय (ऑयली) बना सकता है। इसके साथ ही मैदे में थोड़ी सी पिसी चीनी मिलाना भी फायदेमंद होता है, क्योंकि तलते समय चीनी कैरामेलाइज होती है जिससे भटूरों पर बेहद खूबसूरत और आकर्षक सुनहरा रंग उभर कर आता है।

फर्मेंटेशन के लिए आटे को आराम देना जरूरी

भटूरे बनाने में सबसे आम गलती यह होती है कि लोग मैदा गूंथने के तुरंत बाद ही उसे बेलकर तलने लगते हैं। बेहतरीन परिणाम पाने का असली राज मैदे को आराम देने की प्रक्रिया में छिपा है। गूंथे हुए आटे को किसी गीले सूती कपड़े या ढक्कन से ढककर कम से कम आधे घंटे से लेकर एक घंटे के लिए छोड़ देना चाहिए। इस समयावधि में मैदे के भीतर प्राकृतिक रूप से खमीर (फर्मेंटेशन) उठता है, जो भटूरों को बेलते समय फटने नहीं देता और उन्हें बढ़िया लचीलापन प्रदान करता है।

बेलने की तकनीक और तेल का सही तापमान

स्वाद और बनावट को बरकरार रखने के लिए भटूरों को कभी भी पूरियों की तरह बहुत ज्यादा बारीक या पतला नहीं बेलना चाहिए। इन्हें थोड़ा सा मोटा रखने पर ये कढ़ाई में जाते ही समान रूप से फूलते हैं। इसके अतिरिक्त, सबसे महत्वपूर्ण पहलू तेल का तापमान है; भटूरों को हमेशा तेज गर्म तेल में ही तलना चाहिए। अगर तेल पूरी तरह गर्म नहीं होगा, तो भटूरे फूलने के बजाय कड़क हो जाएंगे और सारा तेल सोख लेंगे, वहीं दूसरी ओर अत्यधिक खौलता हुआ तेल भटूरों को अंदर से कच्चा रखकर ऊपर से तुरंत काला या गहरा भूरा कर देता है।

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