सहयोगियों के बीच उद्धव की चिंता, बोले- क्या हमारी एकता सिर्फ दिखावा है?

मुंबई: महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को मजबूत करने के लिए शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। गठबंधन के भीतर एकजुटता बढ़ाने के इरादे से उन्होंने विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ सीधे संवाद के लिए महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकें की हैं। इस बैठक में उद्धव ठाकरे ने मौजूद नेताओं और विधायकों के सामने कुछ बेहद तीखे और आत्मनिरीक्षण करने वाले सवाल रखे। साथ ही राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात पर भी गहराई से चर्चा की गई। यह बैठक ऐसे नाजुक समय में बुलाई गई, जब हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों ने बगावत का रास्ता चुना है, जिसके कारण अब पूरे विपक्षी गठबंधन के लिए एकजुट रहना और भी ज्यादा जरूरी हो गया है।

उद्धव ठाकरे ने पूछा- क्या हम सच में एक हैं?

बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने बेहद सीधे और साफ शब्दों में कहा, "हम बाहर यह तो कहते हैं कि हम महाविकास अघाड़ी के रूप में पूरी तरह एकजुट हैं, लेकिन क्या सचमुच हम दिल से एक हैं? अगर ऐसा है, तो आज से ही हमें मिलकर जमीनी स्तर पर काम करना होगा और अपनी इस एकता को बनाए रखना होगा।" ठाकरे के इस सवाल ने गठबंधन के नेताओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। इसके बाद एमवीए के शीर्ष नेतृत्व ने सभी विधायकों और विधान परिषद सदस्यों (MLCs) को एकजुट रहने का कड़ा संदेश दिया। नेताओं ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि जनता के असल मुद्दों को सिर्फ विधानसभा के अंदर ही नहीं, बल्कि सदन के बाहर सड़कों पर भी पूरी ताकत से उठाया जाना चाहिए।

बागी नेताओं को भूल भविष्य की रणनीति पर ध्यान

बैठक में यह रणनीति भी तय की गई कि जो सांसद या नेता पार्टी और गठबंधन का साथ छोड़कर जा चुके हैं, अब उनके बारे में सोचकर समय गंवाने की कोई जरूरत नहीं है। इसके बजाय, महाविकास अघाड़ी के नेतृत्व को बार-बार मिलकर आगे की नई नीतियां तय करनी चाहिए। इस बात को भी रेखांकित किया गया कि विधानसभा के भीतर और बाहर सभी विधायकों को बेहतर तालमेल (समन्वय) के साथ एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर जनता के बीच विपक्ष का भरोसा मजबूत हो सके। इस अहम बैठक में एमवीए के कुल 60 विधायक और 36 एमएलसी शामिल हुए, जो इस गठबंधन की मजबूत मौजूदगी को दिखाता है।

सांसदों की बगावत के बाद बढ़ी चिंता

महाविकास अघाड़ी महाराष्ट्र विधानसभा का मुख्य विपक्षी मोर्चा है, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) के साथ-साथ कांग्रेस और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल हैं। दरअसल, हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने पाला बदल लिया था, जिनमें संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल के नाम शामिल हैं। इन सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद से ही उद्धव ठाकरे की चिंताएं बढ़ गई हैं, यही वजह है कि वे अब पूरे कुनबे को एकजुट रखने और अपनी संगठनात्मक ताकत को दोबारा हासिल करने के लिए हर संभव कोशिश में जुट गए हैं।

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