सावन शुरू होने से पहले अंडों के दाम आसमान पर, रिटेल बाजार में बढ़ी कीमत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में सावन का महीना शुरू होने से ठीक पहले अंडों की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिल रही है। वर्तमान स्थिति यह है कि पोल्ट्री स्तर पर एक अंडे की कीमत करीब 6.95 रुपये प्रति पीस चल रही है, जबकि खुदरा बाजार में यही अंडा 8 से 9 रुपये तक बिक रहा है। हालांकि, यदि ग्राहक दुकानों से एक साथ दर्जन के हिसाब से अंडे खरीदते हैं, तो उन्हें कुछ राहत मिल जाती है, लेकिन छिटपुट या एक-दो अंडे खरीदने वाले उपभोक्ताओं को इसके लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
उत्पादन लागत में भारी उछाल बना मुख्य वजह
पोल्ट्री कारोबारियों और जानकारों के मुताबिक, अंडों के महंगे होने के पीछे सबसे बड़ा कारण मुर्गियों के चारे और पोषण सामग्री की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी होना है।
बाजार में मक्का, कनकी और आवश्यक विटामिन की कीमतें पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी हैं।
उत्पादन की इस बढ़ी हुई लागत का सीधा और प्रतिकूल प्रभाव अब सीधे तौर पर अंडों के खुदरा और थोक दामों पर पड़ रहा है।
छत्तीसगढ़ में रोजाना होता है लाखों अंडों का उत्पादन
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ देश में प्रमुख अंडा उत्पादक राज्यों में शुमार है।
दैनिक उत्पादन: प्रदेशभर में प्रतिदिन औसतन लगभग 80 लाख अंडों का कुल उत्पादन किया जाता है।
आपूर्ति और खपत: इस कुल उत्पादन का करीब 45 से 50 प्रतिशत हिस्सा दूसरे राज्यों में निर्यात (सप्लाई) किया जाता है, जबकि शेष बचे अंडों की खपत राज्य के भीतर ही होती है।
हालांकि, हाल ही में भीषण गर्मी के मौसम के दौरान मांग घटने के कारण उत्पादन पर भी असर पड़ा था, लेकिन अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
खुदरा बाजार में अलग-अलग हैं कीमतें
शहर की प्रमुख पोल्ट्री और चिकन की दुकानों पर अंडा वर्तमान में लगभग 8 रुपये प्रति पीस के भाव से बिक रहा है, जबकि कई स्थानीय किराना स्टोर्स पर यही अंडा 9 रुपये तक बेचा जा रहा है। इस पर दुकानदारों का तर्क है कि उन्हें खुद थोक मंडियों से ऊंचे दामों पर माल मिल रहा है, जिसके कारण खुदरा बिक्री भी महंगी करनी पड़ रही है।
सावन के बाद कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद
पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों का अनुमान है कि सावन के पवित्र महीने के दौरान मांसाहारी उत्पादों की मांग में आमतौर पर गिरावट आती है, जिससे कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, इस बार मुर्गियों के चारे की अत्यधिक उत्पादन लागत को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिलेगी।
